राज्य विद्युत उत्पादन निगम की पनकी व जवाहरपुर ताप विद्युत परियोजनाओं के संचालन और अनुरक्षण का कार्य निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी है। इसके लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। मामले की जानकारी मिलते ही बिजली कर्मचारी संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। पनकी ताप विद्युत परियोजना (कानपुर) लगभग 100 इंजीनियर, 75 जूनियर इंजीनियर, 75 टेक्नीशियन ग्रेड-2, 245 अन्य नियमित कर्मचारी तथा 500 से अधिक संविदाकर्मी कार्यरत हैं।


इसी प्रकार जवाहरपुर परियोजना (एटा) में करीब 150 इंजीनियर, 90 जूनियर इंजीनियर, 100 टेक्नीशियन ग्रेड-2, 135 अन्य कर्मचारी और 500 से अधिक संविदाकर्मी कार्य कर रहे हैं। फिलहाल इन परियोजनाओं का संचालन और रखरखाव का कार्य राज्य विद्युत उत्पादन निगम करता रहा है। 13 अप्रैल को निगम के अधीक्षण अभियंता रविंद्र कुमार श्रीवास्तव ने परियोजना के मुख्य प्रबंधक को पत्र भेजा है। कहा गया है कि दोनों परियोजनाओं का रखरखाव और संचालन के लिए यूनिफाइड टेंडर प्रस्ताव मुख्यालय भेजा जाए। इसकी जानकारी मिलते ही बिजली कर्मचारी संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है।

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संघर्ष समिति ने दी आंदोलन की चेतावनी

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा है पनकी और जवाहरपुर परियोजनाओं का संचालन निजी कंपनियों को सौंपा जाता है, तो लगभग 2000 से अधिक कर्मचारियों की सेवाएं अनावश्यक घोषित कर उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि यह कदम मुनाफा कमाने वाले उत्पादन निगम को कमजोर कर सार्वजनिक क्षेत्र को समाप्त करने की शुरुआत है। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी कि यदि इन जनविरोधी निर्णयों को वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक एवं उग्र किया जाएगा।



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