
पीजीआई की बेड संख्या होगी सार्वजनिक।
– फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों की इमरजेंसी व्यवस्था में सुधार किया जाएगा। इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर को मरीज रेफर करते वक्त कारण भी बताना होगा। इस संबंध में सभी कॉलेजों के प्रधानाचार्य व चिकित्सा अधीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं। रेफर करते वक्त दिए गए इलाज का पूरा विवरण और किस तरह की सुविधा की जरूरत है, इसे विस्तार से लिखना होगा।
प्रदेश के 45 जिलों में राजकीय अथवा स्वशासी मेडिकल कॉलेज समूचे संसाधन के साथ चल रहे हैं, जबकि कुछ जिलों में अभी ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं शुरू की गई हैं। इसके बाद भी मामूली बीमारियों से ग्रसित मरीजों को केजीएमयू, पीजीआई, लोहिया संस्थान जैसे चिकित्सा संस्थानों में रेफर कर दिया जाता है। ट्रॉमा सर्जरी और इमरजेंसी चिकित्सकों की ओर से कराए गए सर्वे में यह बात सामने आई कि मामूली बीमारियों वाले मरीजों को भी रेफर करने से कई तरह की समस्याएं बढ़ती हैं।
एक तरफ चिकित्सा संस्थानों में गंभीर मरीजों पर लगने वाला मैनपावर सामान्य मरीजों में उलझ जाता है तो दूसरी तरफ मरीज को घंटों सफर करना पड़ता है। इस रिपोर्ट के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से कॉलेजों की इमरजेंसी व्यवस्था सुधारने की रणनीति तैयार की गई है। इसके तहत हर मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा संस्थानों की तरह ही ट्रायज एरिया बनाया जाएगा। इसे अलग-अलग जोन में बांटा जाएगा। जो मरीज रेड जोन में रहेंगे और स्थानीय संसाधन उनके इलाज के लिए नाकाफी होंगे, उन्हें ही रेफर किया जाएगा। चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण निदेशालय और सचिव चिकित्सा शिक्षा के स्तर पर हर 15 दिन में रेफर होने वाले मरीजों की समीक्षा भी की जाएगी। जिन अस्पतालों में संसाधनों की कमी होगी, वहां की इमरजेंसी में संसाधन बढ़वाए जाएंगे।
