लखनऊ। मुआवजे के विवाद में करीब 20 साल से फंसी एलडीए की सीतापुर रोड स्थित 840 हेक्टेयर की आवासीय योजना प्रबंध नगर का रास्ता अब साफ हो गया है। न्यायालय भूमि अर्जन और पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण (लारा कोर्ट) ने यहां जमीन के मुआवजा की दर तय कर दी है। अब करीब चार हजार किसानों को 01 करोड़ 10 लाख 70 हजार रुपये प्रति बीघा की दर से मुआवजा मिलेगा। यह पहले (2.57 लाख रुपये प्रति बीघा) के मुकाबले करीब 50 गुना ज्यादा है। यह योजना आने से करीब दो लाख की आबादी को आवासीय सुविधा मिलेगी।

एलडीए ने प्रबंध नगर के लिए जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना 13 सितंबर 2007 को जारी की थी। इसमें घैला, ककौली और अल्लूनगर डिगुरिया गांव की 3350 बीघा जमीन ली जानी थी। जमीन लेने के समय ही किसानों से मुआवजे पर विवाद हो गया। इस बीच कुछ लोग मामले को लारा कोर्ट लेकर चले गए। तर्क दिया कि योजना विकसित करने से हजारों पेड़ काटे जाएंगे। इसके साथ ही प्राकृतिक जल स्रोत तालाब आदि समाप्त हो जाएंगे। इससे पर्यावरण को भारी नुकसान होगा। इस कारण एलडीए को योजना विकसित करने के लिए जरूरी पर्यावरण अनापत्ति नहीं मिली।

इसके बाद एलडीए में योजना का ड्रोन से सर्वे कराया ताकि पता चला सके कि आपत्ति कितनी सही है। इसमें पाया गया कि समय के साथ योजना में तमाम निर्माण हुए हैं और पेड़, जल स्रोत भी कम हुए हैं। यह भी बताया गया कि मौजूद पेड़ों और जल स्रोतों को कैसे बचाया जाएगा। पूरी कार्ययोजना समझने के बाद लारा कोर्ट ने मुआवजा बढ़ा दिया। इससे किसानों और एलडीए के बीच चल रहा विवाद थम गया है। कोर्ट के आदेश को एलडीए की बोर्ड बैठक में पास कराया जाएगा। इसके बाद योजना लॉन्च की जाएगी।

अधर में फंसे किसानों को मिलेगी राहत

योजना शुरू होने से उन सैकड़ों किसानों को भी राहत मिलेगी जिनकी जमीन अधिग्रहीत हुई थी। एलडीए ने न तो उनकी जमीन छोड़ी थी और न ही मुआवजा बढ़ाया था। रजिस्ट्री पर रोक के कारण किसान जमीन बेच भी नहीं पा रहे थे। इस कारण आर्थिक संकट से गुजर रहे किसान आंदोलन भी करते रहते थे। एलडीए के अधिकारी ने बताया कि काम शुरू होने से पहले प्राधिकरण योजना में अवैध प्लॉटिंग कर बनाए गए निर्माणों पर बुलडोजर चलाएगा। रजिस्ट्री पर रोक के बाद भी कुछ प्रॉपर्टी डीलर प्लॉटिंग कर रहे हैं। जैसे ही न्यायालय से विवाद हल होगा एलडीए अभियान शुरू कर देगा।

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कोट

प्रबंध नगर योजना का मुआवजा बढ़ा दिया गया है। कोर्ट के आदेश को एलडीए की बोर्ड बैठक में रखकर पास कराया जाएगा। इसके बाद योजना लॉन्च की जाएगी। ग्रीन कॉरिडोर बनने के बाद यह योजना और बेहतर हो गई है।

– प्रथमेश कुमार, वीसी, एलडीए



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