Muzaffarnagar के मोरना ब्लॉक स्थित धीराहेड़ी गांव में आयोजित भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) की महत्वपूर्ण बैठक में संगठन विस्तार, किसान एकजुटता और आगामी कार्यक्रमों को लेकर व्यापक रणनीति बनाई गई। बैठक के दौरान भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता Rakesh Tikait ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कार्यकर्ताओं और किसानों को राजनीतिक रूप से सतर्क रहने की सलाह दी।
बैठक में बड़ी संख्या में किसान, ग्रामीण, युवा कार्यकर्ता और संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान किसानों से गांव-गांव जाकर संगठन को मजबूत करने और युवा वर्ग को किसान आंदोलन से जोड़ने का आह्वान किया गया।
‘भर्ती अभियान चला रही भाजपा’, राकेश टिकैत का बड़ा बयान
बैठक को संबोधित करते हुए Rakesh Tikait ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी पूरे देश में “भर्ती अभियान” चला रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो भी सरकार के खिलाफ आवाज उठाता है, उसे अपनी पार्टी में शामिल करने की कोशिश की जाती है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा, “तुम लोगों पर भी डोरे डाले जाएंगे, मंत्र फूंके जाएंगे, लेकिन इनके बहकावे में मत आना।” उनके इस बयान के बाद बैठक में मौजूद किसानों और कार्यकर्ताओं ने जोरदार समर्थन भी जताया।
राकेश टिकैत ने कहा कि किसान आंदोलन की असली ताकत उसकी एकजुटता और जमीनी संगठन में है। अगर किसान संगठित रहेंगे, तो उनकी आवाज को दबाना आसान नहीं होगा।
संगठन विस्तार और युवा सदस्यता अभियान पर विशेष जोर
बैठक में भारतीय किसान यूनियन के संगठन विस्तार को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गई। पदाधिकारियों ने बताया कि गांव-गांव जाकर सदस्यता अभियान चलाया जाएगा और युवाओं को बड़ी संख्या में संगठन से जोड़ा जाएगा।
राकेश टिकैत ने युवाओं को किसान राजनीति और किसान हितों की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि खेती-किसानी से जुड़े मुद्दे केवल बुजुर्ग किसानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी इससे जुड़ा हुआ है।
बैठक में यह भी तय किया गया कि मोरना ब्लॉक सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों में लगातार जनसभाएं और किसान बैठकें आयोजित की जाएंगी।
15 मई को महेंद्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि पर होंगे कार्यक्रम
बैठक के दौरान किसान नेता Mahendra Singh Tikait की आगामी पुण्यतिथि को लेकर भी चर्चा हुई। संगठन की ओर से बताया गया कि 15 मई को विभिन्न स्थानों पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
भाकियू नेताओं ने कहा कि चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने किसानों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का काम किया था। उनके संघर्ष और आंदोलन आज भी किसानों के लिए प्रेरणा माने जाते हैं।
बैठक में मौजूद कई वक्ताओं ने कहा कि टिकैत परिवार ने लंबे समय से किसान हितों के लिए संघर्ष किया है और आज भी किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया जा रहा है।
हरिद्वार चिंतन महाकुंभ को लेकर भी बनी रणनीति
बैठक में जून माह में हरिद्वार में प्रस्तावित चिंतन महाकुंभ को लेकर भी मंथन किया गया। संगठन के नेताओं ने बताया कि इस कार्यक्रम में किसान आंदोलन, कृषि नीति, एमएसपी, गन्ना भुगतान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था जैसे कई मुद्दों पर चर्चा होगी।
भाकियू पदाधिकारियों ने कहा कि चिंतन महाकुंभ केवल संगठनात्मक बैठक नहीं बल्कि किसानों की भविष्य की रणनीति तय करने का मंच भी होगा। इसमें विभिन्न राज्यों से किसान प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।
धीराहेड़ी गांव में जुटे किसान और ग्रामीण
यह बैठक भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के निर्देश और जिलाध्यक्ष चौधरी नवीन राठी के नेतृत्व में आयोजित की गई थी। कार्यक्रम के आयोजन में ब्लॉक अध्यक्ष अनुज राठी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
बैठक में मोरना ब्लॉक के कई गांवों से किसान पहुंचे। ग्रामीणों ने खेती-किसानी से जुड़े स्थानीय मुद्दों, बिजली, सिंचाई, फसलों की लागत और बाजार व्यवस्था को लेकर भी चर्चा की।
कार्यक्रम के दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने दावा किया कि जिलेभर में इसी तरह की बैठकों का सिलसिला जारी रहेगा, ताकि जमीनी स्तर पर संगठन को और मजबूत किया जा सके।
पश्चिमी यूपी की राजनीति में किसान संगठनों की सक्रियता बढ़ी
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान संगठनों की सक्रियता लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। किसान आंदोलन के बाद से भाकियू और अन्य किसान संगठन लगातार गांव स्तर पर बैठकों और पंचायतों के माध्यम से अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिमी यूपी में किसान संगठन केवल कृषि मुद्दों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अब वे सामाजिक और राजनीतिक चर्चाओं का भी बड़ा हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में राकेश टिकैत के बयान आने वाले समय में राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन सकते हैं।
किसानों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटा संगठन
बैठक में बार-बार संगठन की एकता पर जोर दिया गया। नेताओं ने कहा कि किसान अगर बंट जाएंगे तो उनकी समस्याओं का समाधान मुश्किल हो जाएगा। इसी वजह से गांव स्तर पर संवाद बढ़ाने और किसानों को संगठित रखने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।
भाकियू नेताओं ने दावा किया कि आने वाले समय में किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन और जनसभाओं का दायरा और बढ़ाया जाएगा।
