Muzaffarnagar। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने की मांग एक बार फिर सड़क पर दिखाई दी। शिवसेना के पश्चिम उत्तर प्रदेश प्रमुख ललित मोहन शर्मा के आह्वान पर मुजफ्फरनगर में पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पश्चिम उत्तर प्रदेश के लिए अलग राज्य के गठन के साथ क्षेत्र में AIIMS और हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग भी उठाई गई।

जिलाध्यक्ष मुकेश त्यागी के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ता पार्टी कार्यालय से जुलूस के रूप में निकले और शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए प्रधानमंत्री के नाम अपर जिला मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए अलग राज्य और हाईकोर्ट बेंच की मांग नई नहीं है। हाईकोर्ट बेंच को लेकर क्षेत्र के अधिवक्ता संगठनों का आंदोलन लंबे समय से चला आ रहा है और सितंबर 2026 में भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों में अधिवक्ताओं ने इस मुद्दे पर आंदोलन किया है।

पश्चिम यूपी को अलग राज्य बनाने की मांग पर प्रदर्शन

शिवसेना नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान पश्चिम उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने की मांग को प्रमुखता से उठाया। पार्टी नेताओं का कहना था कि वर्तमान में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का क्षेत्र काफी बड़ा है और उनकी दृष्टि में प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए अलग राज्य की मांग पर विचार किया जाना चाहिए।

राज्य के पुनर्गठन की मांग पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में समय-समय पर उठती रही है। इससे पहले भी अलग पश्चिमी उत्तर प्रदेश राज्य को लेकर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की ओर से आवाजें उठती रही हैं। 2023 में भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने की मांग सार्वजनिक राजनीतिक बहस का विषय बनी थी।

मुजफ्फरनगर में हुए ताजा प्रदर्शन में शिवसेना ने इस मुद्दे को संगठनात्मक आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने की बात कही।

AIIMS और हाईकोर्ट बेंच की मांग भी आंदोलन में शामिल

अलग राज्य की मांग के साथ शिवसेना कार्यकर्ताओं ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में AIIMS की स्थापना और हाईकोर्ट बेंच बनाए जाने की मांग भी उठाई।

पार्टी के राज्य महासचिव बिट्टू सिखेड़ा और मंडल प्रमुख शरद कपूर ने संयुक्त रूप से कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अलग राज्य, AIIMS और हाईकोर्ट बेंच की मांग को वे क्षेत्र की आवश्यकताओं से जोड़कर देखते हैं।

उनका कहना था कि इन मांगों को लेकर आंदोलन की शुरुआत हो चुकी है और पार्टी की ओर से इसे आगे भी जारी रखने की बात कही गई।

यहां यह उल्लेखनीय है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर अधिवक्ता संगठनों का अलग से भी आंदोलन चल रहा है। सितंबर 2026 में मेरठ सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों के अधिवक्ताओं ने इस मुद्दे पर कामबंद आंदोलन किया था।

‘बड़े राज्य में प्रशासनिक जरूरतें पूरी करना चुनौती’

प्रदर्शन के दौरान शिवसेना नेताओं ने उत्तर प्रदेश के आकार और प्रशासनिक व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया। उनका तर्क था कि इतने बड़े राज्य में अलग-अलग क्षेत्रों की स्थानीय जरूरतों को एक ही प्रशासनिक ढांचे के माध्यम से पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

नेताओं ने छोटे राज्यों को लेकर अपनी राजनीतिक राय रखते हुए कहा कि क्षेत्रीय स्तर पर प्रशासन और विकास से संबंधित जरूरतों को देखते हुए छोटे राज्यों की मांग पर विचार होना चाहिए।

शिवसेना की ओर से कहा गया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए अलग राज्य का मुद्दा अब केवल चर्चा तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसके लिए आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।

पार्टी कार्यालय से कलेक्ट्रेट तक निकला जुलूस

प्रदर्शन से पहले पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता मुजफ्फरनगर स्थित शिवसेना कार्यालय पर एकत्र हुए। इसके बाद सभी जुलूस के रूप में कलेक्ट्रेट के लिए रवाना हुए।

जुलूस कोर्ट रोड, हनुमान मंदिर, शिव चौक और सदर बाजार से होकर गुजरा। विभिन्न मार्गों से होते हुए कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।

इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने अपर जिला मजिस्ट्रेट को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन के माध्यम से अलग पश्चिम उत्तर प्रदेश राज्य, AIIMS और हाईकोर्ट बेंच से संबंधित मांगों को केंद्र सरकार तक पहुंचाने की बात कही गई।

महिला मोर्चा ने भी आंदोलन में भागीदारी की अपील की

प्रदर्शन में शिवसेना के महिला मोर्चे की पदाधिकारियों ने भी भाग लिया। भवानी सेना की जिलाध्यक्ष पूनम चौधरी और सुमन प्रजापति ने महिलाओं से अलग राज्य की मांग को लेकर आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की अपील की।

उन्होंने महिलाओं से संगठन के आंदोलन में आगे आने और सड़क पर उतरकर अपनी भागीदारी दर्ज कराने का आह्वान किया।

इस दौरान बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता भी मौजूद रहीं।

ललित मोहन शर्मा के आह्वान पर आंदोलन की शुरुआत का दावा

शिवसेना नेताओं ने कहा कि पश्चिम उत्तर प्रदेश प्रमुख ललित मोहन शर्मा के आह्वान पर आंदोलन का आगाज किया गया है। पार्टी नेताओं के अनुसार जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन को आगे बढ़ाने की योजना है।

मुजफ्फरनगर में हुए प्रदर्शन को इसी व्यापक अभियान की शुरुआत के रूप में प्रस्तुत किया गया।

हालांकि अलग पश्चिमी उत्तर प्रदेश राज्य का गठन एक राजनीतिक और संवैधानिक विषय है, जिसके लिए केंद्र और संसद स्तर पर निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया लागू होती है। संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के गठन या मौजूदा राज्यों की सीमाओं में बदलाव से संबंधित विधायी प्रक्रिया संसद के माध्यम से होती है।

हाईकोर्ट बेंच की मांग का पुराना संदर्भ

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग कई दशकों से चली आ रही है। हाल में भी इस मुद्दे पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिवक्ता संगठनों ने आंदोलन तेज किया है। सितंबर 2026 में अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग रखी थी।

रिपोर्टों के मुताबिक उस बातचीत में मुख्यमंत्री की ओर से बेंच स्थापित करने के अधिकार क्षेत्र को लेकर टिप्पणी की गई थी, जिसके बाद अधिवक्ताओं ने आंदोलन आगे बढ़ाने की घोषणा की।

इस पृष्ठभूमि में मुजफ्फरनगर में शिवसेना की ओर से हाईकोर्ट बेंच की मांग उठाना पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चल रही व्यापक क्षेत्रीय मांगों के बीच देखा जा सकता है।

प्रदर्शन में कौन-कौन रहे मौजूद?

मुजफ्फरनगर के प्रदर्शन में पार्टी के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल रहे। कार्यक्रम में पूर्व प्रदेश उप प्रमुख प्रमोद अग्रवाल, जिला महासचिव देवेंद्र चौहान, अनुज चौधरी, जिला उप प्रमुख संजीव वर्मा, नरेंद्र ठाकुर, युवा जिलाध्यक्ष विकास पुंडीर, मंगतराम सोनकर, उज्ज्वल पंडित, आशीष मिश्रा, भुवन मिश्रा, सत्यम कुमार, ललित रुहेला, योगेंद्र सैनी, बाबूराम, राकेश धीमान, निकुंज चौहान, राजेंद्र तायल, कृष्णपाल और अमित गुप्ता प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

इसके अलावा सुभाष योगी, दिनेश उपाध्याय, जतिन वशिष्ठ, अमित मित्तल, अरविंद कौशिक, अरविंद शर्मा, बलबीर प्रजापति, रमाशंकर यादव, प्रदीप जैन, अमित बॉबी, रानी चौधरी, अनोखी दुबे, दाताराम, अवधेश, सोनू कश्यप, सचिन, निशा वर्मा, सुमन प्रजापति, दीपा और अभिषेक सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और महिला पदाधिकारियों की मौजूदगी रही।

ज्ञापन के जरिए केंद्र तक पहुंचाई मांग

कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन प्रधानमंत्री के नाम दिया गया। इसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए अलग राज्य के गठन के साथ AIIMS और हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग शामिल रही।

शिवसेना नेताओं ने कहा कि इन मांगों को लेकर संगठन आगे भी कार्यक्रम आयोजित करेगा।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मांगों को लेकर बढ़ी गतिविधियां

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अलग राज्य और हाईकोर्ट बेंच की मांग अलग-अलग समय पर विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और अधिवक्ता संगठनों द्वारा उठाई जाती रही है। हाईकोर्ट बेंच को लेकर हाल के दिनों में अधिवक्ताओं की गतिविधियां विशेष रूप से सामने आई हैं।

अलग राज्य की मांग भी क्षेत्र की राजनीति में समय-समय पर बहस का हिस्सा रही है। ऐसे में मुजफ्फरनगर में शिवसेना का यह प्रदर्शन इन लंबे समय से उठती क्षेत्रीय मांगों की कड़ी के रूप में सामने आया है।

मुजफ्फरनगर में शिवसेना ने पश्चिम उत्तर प्रदेश से जुड़ी तीन प्रमुख मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। जिलाध्यक्ष मुकेश त्यागी के नेतृत्व में कार्यकर्ता पार्टी कार्यालय से जुलूस निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रधानमंत्री के नाम अपर जिला मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन में अलग पश्चिम उत्तर प्रदेश राज्य के गठन के साथ क्षेत्र में AIIMS और हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग उठाई गई। हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिवक्ता संगठन भी लंबे समय से आंदोलन करते रहे हैं और सितंबर 2026 में यह मुद्दा फिर प्रमुखता से सामने आया है।



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