Muzaffarnagar में NHM संविदा कर्मचारियों ने अपनी वर्षों से लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ की मुजफ्फरनगर शाखा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ कहा कि अगर 7 अक्टूबर तक कर्मचारियों की मांगों और पूर्व में हुए लिखित समझौतों पर ठोस एवं लिखित निर्णय नहीं लिया गया, तो 8 अक्टूबर से प्रदेशव्यापी हड़ताल शुरू की जाएगी।

कर्मचारियों का कहना है कि उनकी कई मांगों पर सरकार और अधिकारियों के स्तर पर पहले ही सहमति बन चुकी है। इतना ही नहीं, कई मुद्दों पर लिखित समझौते भी किए गए, लेकिन वर्षों गुजर जाने के बाद भी उन फैसलों को लागू नहीं किया गया। कर्मचारियों ने सवाल उठाया कि जब सरकार और कर्मचारी प्रतिनिधियों के बीच लिखित समझौते हो चुके हैं, तो फिर उन्हें जमीन पर लागू करने में इतनी लंबी देरी क्यों हो रही है?

2016 की हड़ताल के बाद हुआ था लिखित समझौता

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिला अध्यक्ष डॉ. सचिन जैन ने कहा कि कर्मचारियों की कई मांगों को लेकर पहले भी सरकार और अधिकारियों के साथ समझौते हुए हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण मांग नियमित भर्तियों में एनएचएम स्वास्थ्य कर्मचारियों को अतिरिक्त अंक दिए जाने की थी।

डॉ. जैन के मुताबिक, वर्ष 2016 में कर्मचारियों ने 15 दिन तक लगातार हड़ताल और 10 दिन की भूख हड़ताल की थी। इसके बाद तत्कालीन प्रमुख सचिव स्वास्थ्य के साथ लिखित समझौता हुआ था। कर्मचारियों को बताया गया था कि संबंधित प्रक्रिया लगभग दो महीने में पूरी कर ली जाएगी।

लेकिन कर्मचारी संगठन का दावा है कि लगभग एक दशक बीतने के बावजूद इस संबंध में कोई आदेश जारी नहीं किया गया।

डॉ. सचिन जैन ने कहा कि इस देरी का असर उन कर्मचारियों पर भी पड़ा है, जो उस समय सेवा में थे। उनके अनुसार, उस समय कार्यरत कई कर्मचारी अब निर्धारित आयु सीमा से बाहर हो चुके हैं। ऐसे में यदि अब इस मांग पर फैसला होता भी है तो उन कर्मचारियों को इसका वास्तविक लाभ मिलना मुश्किल हो सकता है।

दूसरे राज्यों जैसी सुविधाओं का भी मुद्दा

कर्मचारी नेताओं ने कहा कि वर्ष 2016 में हुए समझौते में यह भी उल्लेख किया गया था कि दूसरे राज्यों में एनएचएम स्वास्थ्य कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं के अनुरूप उत्तर प्रदेश में भी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

कर्मचारियों का आरोप है कि इस संबंध में भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। संगठन का कहना है कि लंबे समय से एनएचएम के तहत काम कर रहे संविदा कर्मचारियों की सेवा से जुड़ी कई समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं और बार-बार मांग उठाने के बावजूद उनका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

2021 के समझौते में बोनस और इंक्रीमेंट का मुद्दा

डॉ. राहुल वर्मा ने वर्ष 2021 के आंदोलन के बाद हुए समझौते का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि उस समय सरकार और अधिकारियों के साथ लिखित समझौता हुआ था, जिसमें कर्मचारियों के लिए प्रत्येक तीन वर्ष पर 10 प्रतिशत लॉयल्टी बोनस और हर वर्ष 10 प्रतिशत इंक्रीमेंट दिए जाने की बात कही गई थी।

कर्मचारियों का कहना है कि समझौते को हुए कई वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन इन बिंदुओं पर भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। कर्मचारी संगठन अब चाहता है कि सरकार पुराने समझौतों को सिर्फ आश्वासन के तौर पर न रखे, बल्कि उनके क्रियान्वयन के लिए स्पष्ट लिखित आदेश जारी करे।

बार-बार आश्वासन से बढ़ा कर्मचारियों का असंतोष

संगठन के महामंत्री मणिकांत त्यागी ने कहा कि बार-बार लिखित समझौते और आश्वासन मिलने के बावजूद मांगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांग सरकार से टकराव की नहीं है। संगठन चाहता है कि पहले किए गए समझौतों का सम्मान किया जाए और उन्हें लागू करने के लिए स्पष्ट आदेश जारी किए जाएं।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब किसी मांग पर सरकार और अधिकारियों के स्तर पर लिखित सहमति बन चुकी है, तो उसके क्रियान्वयन के लिए कर्मचारियों को बार-बार आंदोलन करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।

15 दिनों से मंत्रियों और विधायकों से मिल रहा प्रतिनिधिमंडल

कोषाध्यक्ष डॉ. फैसल सिद्दीकी ने बताया कि पिछले करीब 15 दिनों से एनएचएम संविदा कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर अलग-अलग मंत्रियों और विधायकों से मुलाकात कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल लगातार जनप्रतिनिधियों के माध्यम से अपनी समस्याएं सरकार तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।

कर्मचारियों का कहना है कि उनका प्रयास यही है कि सरकार के स्तर पर बातचीत और सकारात्मक निर्णय के जरिए हड़ताल की स्थिति को टाला जा सके।

कपिल देव अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

जिला महिला चिकित्सालय से जुड़े संजय कुमार ने बताया कि राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार कपिल देव अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर एनएचएम संविदा कर्मचारियों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने और उनके समाधान में सहयोग का आग्रह किया है।

कर्मचारियों ने इसे अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। हालांकि, उनका कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्पष्ट और लिखित निर्णय की आवश्यकता है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान से भी मिले कर्मचारी

कर्मचारी प्रतिनिधिमंडल पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान से भी मुलाकात कर चुका है। संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार, उन्होंने कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना।

कर्मचारियों का कहना है कि डॉ. संजीव बालियान ने उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक से फोन पर बातचीत कर एनएचएम संविदा कर्मचारियों की मांगों के समाधान में सहयोग का आग्रह किया।

अब कर्मचारियों की नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर है।

राजनाथ सिंह के पुराने आश्वासन का भी उठा मुद्दा

स्टाफ नर्स डिंपल रानी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार बनने से पहले लखनऊ में आयोजित एक रैली में तत्कालीन राष्ट्रीय स्तर के नेता और वर्तमान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण और सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिए जाने की बात कर्मचारी लंबे समय से कहते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार को सत्ता में आए करीब 10 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन कर्मचारियों की कई प्रमुख समस्याओं का स्थायी समाधान अभी तक नहीं हुआ है।

डिंपल रानी के अनुसार, कर्मचारियों ने राजनाथ सिंह से मुलाकात करने के कई प्रयास किए, लेकिन अभी तक उनके साथ प्रत्यक्ष वार्ता नहीं हो सकी है।

‘लिखित आदेश से ही बहाल होगा कर्मचारियों का भरोसा’

मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में कार्यरत रवि कुमार ने कहा कि वर्षों से मांगें लंबित रहने और बार-बार लिखित समझौते होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से कर्मचारियों में निराशा है।

उन्होंने कहा कि कर्मचारियों का भरोसा बहाल करने के लिए सरकार को स्पष्ट लिखित आदेश जारी करना चाहिए। उनका कहना है कि इससे कर्मचारियों को यह भरोसा होगा कि उनके मुद्दों का समाधान वास्तव में किया जा रहा है और वे पूरी निष्ठा एवं मनोयोग के साथ अपने राजकीय दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे।

8 अक्टूबर से हड़ताल की चेतावनी क्यों अहम?

एनएचएम के तहत काम करने वाले संविदा कर्मचारी प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में अलग-अलग स्तरों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते हैं। ऐसे में यदि संगठन की घोषणा के अनुसार 8 अक्टूबर से प्रदेशव्यापी हड़ताल होती है, तो स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका असर पड़ने की आशंका है।

इसी वजह से कर्मचारी संगठन अंतिम समय तक सरकार से बातचीत और निर्णय की उम्मीद कर रहा है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि उसकी प्राथमिकता टकराव नहीं, बल्कि पूर्व में किए गए समझौतों का पालन और लंबित मांगों का समाधान है।

7 अक्टूबर की डेडलाइन, अब सरकार के फैसले पर नजर

मुजफ्फरनगर में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए कर्मचारी संगठन ने सरकार के सामने अपनी समयसीमा स्पष्ट कर दी है। संगठन चाहता है कि 7 अक्टूबर तक लंबित मांगों और पुराने लिखित समझौतों के संबंध में ठोस एवं लिखित निर्णय लिया जाए।

अगर ऐसा नहीं होता है तो कर्मचारियों ने 8 अक्टूबर से प्रदेशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि हड़ताल टालने का रास्ता अभी भी खुला है, लेकिन इसके लिए सरकार को अब ठोस कदम उठाना होगा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. सचिन जैन, डॉ. राहुल वर्मा, डॉ. फैसल सिद्दीकी, डॉ. सुदेश वर्मा, डॉ. शमशेर, स्टाफ नर्स डिंपल रानी, डाटा ऑपरेटर संजय कुमार, रवि कुमार, डाइटिशियन नेहा त्यागी समेत संगठन के अन्य पदाधिकारी और एनएचएम संविदा कर्मचारी मौजूद रहे।

मुजफ्फरनगर से उठी एनएचएम संविदा कर्मचारियों की यह आवाज अब प्रदेशव्यापी आंदोलन की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने बातचीत, प्रतिनिधिमंडल और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने की पूरी कोशिश की है। अब 7 अक्टूबर तक सरकार की ओर से मिलने वाला लिखित निर्णय तय करेगा कि 8 अक्टूबर को प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े हजारों कर्मचारी काम पर रहेंगे या अपनी लंबित मांगों को लेकर हड़ताल का रास्ता अपनाएंगे।



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