Muzaffarnagar में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत साइबर क्राइम थाना पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने जॉब और लोन फ्रॉड के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी कई राज्यों के लोगों को अपना निशाना बनाकर लाखों रुपये की साइबर ठगी कर चुके थे।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपियों के खिलाफ विभिन्न राज्यों से साइबर क्राइम पोर्टल पर कई शिकायतें दर्ज थीं। साइबर थाना टीम ने तकनीकी जांच और ऑनलाइन मॉनिटरिंग के जरिए पूरे नेटवर्क का खुलासा किया।
प्रतिबिम्ब पोर्टल से मिला सुराग, मोबाइल नंबरों से खुला फ्रॉड नेटवर्क
मामले का खुलासा गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा विकसित ऑनलाइन पोर्टल “प्रतिबिम्ब” के जरिए हुआ। जांच के दौरान जनपद मुजफ्फरनगर से जुड़े कुछ मोबाइल नंबर और आईएमईआई संदिग्ध गतिविधियों में सक्रिय पाए गए।
साइबर क्राइम पुलिस ने जब इन नंबरों और मोबाइल डिवाइस की गहन जांच की तो पता चला कि इन्हीं नंबरों के जरिए भोले-भाले लोगों को नौकरी और लोन दिलाने के नाम पर कॉल की जाती थी। आरोपी लोगों को प्रोसेसिंग फीस, वेरिफिकेशन चार्ज और डॉक्यूमेंट अप्रूवल के नाम पर रकम जमा कराने के लिए फंसाते थे।
पुलिस के मुताबिक ठग बेहद प्रोफेशनल तरीके से लोगों को भरोसे में लेते थे और खुद को बैंक कर्मचारी, फाइनेंस एजेंट या निजी कंपनी के प्रतिनिधि बताकर बात करते थे।
कई राज्यों से दर्ज मिलीं साइबर ठगी की शिकायतें
साइबर थाना टीम ने जब तकनीकी डाटा और मोबाइल नंबरों की जांच आगे बढ़ाई, तो सामने आया कि इन नंबरों से जुड़े कुल 16 साइबर अपराध की शिकायतें अलग-अलग राज्यों से दर्ज हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपियों ने कई लोगों से भारी रकम ठगी है और अब भी अन्य शिकायतों की जांच जारी है। शुरुआती जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि गिरोह का नेटवर्क उत्तर प्रदेश से बाहर भी फैला हुआ था।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में जॉब फ्रॉड और इंस्टेंट लोन फ्रॉड तेजी से बढ़े हैं, जहां बेरोजगारी और आर्थिक जरूरतों का फायदा उठाकर लोगों को ऑनलाइन जाल में फंसाया जाता है।
दो आरोपी गिरफ्तार, कई नामों से करते थे पहचान छिपाने की कोशिश
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान Shah Alam उर्फ राजीव शर्मा उर्फ प्रदीप निवासी खतौली और Sangeet Kumar उर्फ राहुल चौधरी उर्फ मनोज निवासी हापुड़ हाल निवासी मेरठ के रूप में हुई है।
पुलिस का कहना है कि आरोपी कई फर्जी नामों और पहचान का इस्तेमाल करते थे ताकि पुलिस और पीड़ितों को भ्रमित किया जा सके। पूछताछ में इनके कई अन्य साथियों के नाम भी सामने आए हैं।
दो अन्य आरोपी अभी फरार, पुलिस कर रही तलाश
मामले में दो अन्य वांछित आरोपियों की पहचान शोएब और फुरकान के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार शोएब मेरठ के कंकरखेड़ा क्षेत्र का निवासी है, जबकि फुरकान दिल्ली के कालिंदी कुंज इलाके से जुड़ा बताया जा रहा है।
साइबर क्राइम पुलिस की टीमें फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में हुई कार्रवाई
यह पूरी कार्रवाई अपर पुलिस महानिदेशक मेरठ जोन और पुलिस उपमहानिरीक्षक सहारनपुर रेंज के निर्देशन में की गई। वहीं Sanjay Kumar Verma, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुजफ्फरनगर के पर्यवेक्षण में साइबर थाना टीम ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया।
कार्रवाई में पुलिस अधीक्षक अपराध Indu Siddharth, क्षेत्राधिकारी अपराध रविंद्र प्रताप सिंह और प्रभारी निरीक्षक कर्मवीर सिंह की विशेष भूमिका रही।
गिरफ्तारी करने वाली टीम में निरीक्षक प्रदीप कुमार, उपनिरीक्षक गौरव चौहान, मुबारिक हसन, हेड कांस्टेबल आकाश चौधरी, बालकिशन, सुनील कुमार और विपिन कुमार शामिल रहे।
कैसे करते थे साइबर फ्रॉड? पुलिस ने बताया पूरा तरीका
जांच में सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया, ऑनलाइन विज्ञापन और मोबाइल कॉल्स के जरिए लोगों से संपर्क करते थे। बेरोजगार युवाओं और लोन की तलाश कर रहे लोगों को टारगेट बनाया जाता था।
उन्हें आकर्षक नौकरी ऑफर, कम ब्याज पर लोन और तुरंत अप्रूवल का लालच दिया जाता था। इसके बाद रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग फीस या फाइल चार्ज के नाम पर रकम ट्रांसफर कराई जाती थी। पैसे मिलते ही आरोपी नंबर बंद कर देते थे या संपर्क खत्म कर देते थे।
साइबर अपराध से बचने के लिए पुलिस की अपील
साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, ऑनलाइन लोन ऑफर या नौकरी के विज्ञापन पर आंख बंद करके भरोसा न करें।
अधिकारियों ने कहा कि किसी भी कंपनी या बैंक के नाम पर पैसे मांगने वालों की पहले पूरी जांच करें। यदि कोई संदिग्ध कॉल या मैसेज मिले तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन या स्थानीय पुलिस से संपर्क करें।
विशेषज्ञों के अनुसार साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं, इसलिए डिजिटल सतर्कता अब बेहद जरूरी हो गई है।
उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध पर सख्ती बढ़ी
प्रदेश सरकार और पुलिस विभाग साइबर अपराध पर नियंत्रण के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं। आधुनिक तकनीक, ऑनलाइन मॉनिटरिंग और केंद्रीय पोर्टल्स की मदद से ऐसे गिरोहों पर कार्रवाई तेज की जा रही है।
मुजफ्फरनगर साइबर थाना की यह कार्रवाई इसी अभियान का हिस्सा मानी जा रही है, जिसने कई राज्यों में फैले साइबर ठगी नेटवर्क को उजागर किया है।
मुजफ्फरनगर साइबर क्राइम पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि ऑनलाइन जॉब और लोन फ्रॉड करने वाले गिरोह अब बेहद संगठित तरीके से काम कर रहे हैं। हालांकि तकनीकी जांच और सतर्क पुलिस कार्रवाई की बदौलत ऐसे अपराधियों तक पहुंचना संभव हो रहा है। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे किसी भी ऑनलाइन ऑफर या फोन कॉल पर तुरंत भरोसा न करें और साइबर सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए जागरूक रहें।
