Muzaffarnagar  जनपद के मंसूरपुर थाना क्षेत्र स्थित गांव खानूपुर की सुभाष कॉलोनी में स्मार्ट मीटरों को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया। देर रात इलाके में उस समय तनाव की स्थिति बन गई जब नाराज ग्रामीणों ने अपने घरों में लगे कई स्मार्ट मीटर उखाड़ दिए। कुछ स्थानों पर लोगों द्वारा कथित रूप से सीधे बिजली लाइन जोड़ने की भी चर्चा सामने आई, जिसके बाद पूरे इलाके में बिजली व्यवस्था और विभागीय कार्यशैली को लेकर बहस तेज हो गई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि विद्युत विभाग ने उनकी सहमति के बिना घरों में स्मार्ट मीटर लगाने की कार्रवाई की। लोगों का कहना है कि मीटर लगाए जाने के बाद बिजली बिलों में अचानक भारी बढ़ोतरी देखने को मिली, जिससे आम परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।


बिना सहमति मीटर लगाने का आरोप, ग्रामीणों में नाराजगी

स्थानीय लोगों का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से नहीं अपनाई गई। ग्रामीणों के अनुसार जब कई परिवार गेहूं कटाई और मजदूरी के सिलसिले में गांव से बाहर गए हुए थे, उसी दौरान बच्चों या घर में मौजूद अन्य सदस्यों पर दबाव बनाकर मीटर लगाए गए।

ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें न तो पूरी जानकारी दी गई और न ही मीटर लगाने से पहले सहमति ली गई। इसी बात को लेकर लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ती चली गई।


बिजली बिलों में अचानक बढ़ोतरी से लोगों में आक्रोश

स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद सबसे बड़ा विवाद बिजली बिलों को लेकर सामने आया। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले जहां सामान्य बिल आता था, वहीं अब मोबाइल पर कुछ ही समय में हजारों रुपये की खपत दिखाई देने लगी।

कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 500 रुपये का रिचार्ज कराने के बावजूद कुछ ही घंटों में 2000 रुपये से अधिक का बिल दर्शाया गया। लोगों का कहना है कि इस तरह के बिल उनके लिए आर्थिक रूप से बेहद मुश्किल पैदा कर रहे हैं।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि स्मार्ट मीटर की रीडिंग और बिलिंग प्रक्रिया को लेकर उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही, जिससे भ्रम और असंतोष दोनों बढ़ रहे हैं।


बेगराजपुर बिजलीघर में कई बार पहुंची शिकायतें

ग्रामीणों ने बताया कि समस्या को लेकर कई बार बेगराजपुर बिजलीघर पहुंचकर अधिकारियों से शिकायत की गई थी। लोगों ने बिलों की जांच और पुराने मीटर दोबारा लगाने की मांग भी उठाई, लेकिन जब समाधान नहीं हुआ तो गुस्सा खुलकर सामने आ गया।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद यदि समय रहते समस्या का समाधान किया जाता, तो स्थिति इतनी तनावपूर्ण नहीं बनती।


स्मार्ट मीटर हटाने की मांग, बड़े आंदोलन की चेतावनी

नाराज ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि स्मार्ट मीटर हटाकर पुराने मीटर दोबारा नहीं लगाए गए तो आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। लोगों का कहना है कि वे अपनी आर्थिक क्षमता से अधिक बिजली बिल स्वीकार नहीं करेंगे।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि विभाग ने जबरन कार्रवाई जारी रखी तो विरोध प्रदर्शन और तेज किया जाएगा। घटना के बाद गांव में कई स्थानों पर लोगों के बीच बिजली व्यवस्था को लेकर चर्चा होती रही।


राजनीतिक हलचल भी तेज, आरएलडी नेता पहुंचे मौके पर

मामले ने राजनीतिक रंग भी लेना शुरू कर दिया है। आरएलडी किसान प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष Bhupendra Rathi मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की।

उन्होंने कहा कि जनता की सहमति के बिना स्मार्ट मीटर थोपना उचित नहीं है। भूपेंद्र राठी ने विद्युत विभाग को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि लोगों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया तो बड़ा जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि आम उपभोक्ता पहले से महंगाई और आर्थिक दबाव से जूझ रहा है, ऐसे में अचानक बढ़े हुए बिजली बिल लोगों की परेशानी और बढ़ा रहे हैं।


ग्रामीणों ने रखी अपनी नाराजगी खुलकर

घटना के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर मौजूद रहे। पवन, राकेश, नवाब, कवरपाल, चंद्रपाल, अरविंद, मोनू, ममता, मुनेश, कविता, शेफाली, शिक्षा, मुकेश, केदारनी और सीता सहित कई लोगों ने अपनी समस्याएं खुलकर सामने रखीं।

महिलाओं ने भी आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद घर का मासिक बजट प्रभावित हो गया है और बिजली खर्च अचानक बढ़ गया है।


स्मार्ट मीटर योजना को लेकर पहले भी उठ चुके हैं सवाल

यह पहली बार नहीं है जब स्मार्ट मीटरों को लेकर विरोध सामने आया हो। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में उपभोक्ताओं द्वारा अधिक बिलिंग, तेज रीडिंग और तकनीकी दिक्कतों को लेकर शिकायतें उठती रही हैं।

हालांकि बिजली विभाग लगातार यह दावा करता रहा है कि स्मार्ट मीटर पारदर्शिता बढ़ाने और बिजली चोरी रोकने के लिए लगाए जा रहे हैं, लेकिन कई क्षेत्रों में उपभोक्ताओं के बीच इसे लेकर अविश्वास की स्थिति भी बनी हुई है।


बिजली विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल

मंसूरपुर की घटना के बाद विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि उपभोक्ताओं को पहले जागरूक किया जाता और उनकी शंकाओं का समाधान किया जाता, तो विरोध की स्थिति पैदा नहीं होती।

विशेषज्ञों का मानना है कि नई तकनीक लागू करते समय जनसंवाद और पारदर्शिता बेहद जरूरी होती है, अन्यथा असंतोष तेजी से बढ़ सकता है।


इलाके में तनावपूर्ण शांति, प्रशासन की नजर बनी हुई

घटना के बाद इलाके में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है। प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है।

ग्रामीणों और बिजली विभाग के बीच बातचीत की संभावना भी जताई जा रही है ताकि विवाद का समाधान निकाला जा सके।


मंसूरपुर के खानूपुर गांव में स्मार्ट मीटरों को लेकर उभरा यह विरोध केवल बिजली बिलों का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह ग्रामीणों और विभाग के बीच भरोसे के संकट के रूप में भी देखा जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन और विद्युत विभाग लोगों की शिकायतों का समाधान किस तरह करते हैं और बढ़ते असंतोष को शांत करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।



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