संवाद न्यूज एजेंसी

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झांसी। श्रमिक वर्ग और मध्यम आयवर्ग के लिए रेल सस्ता और सुलभ यातायात साधन है, लेकिन जिस प्रकार लंबी दूरी की ट्रेनों से जनरल कोच और स्लीपर कोच घटते गए, उससे अब इनमें यात्रा करने वाले सफर खड़े होकर या ट्रेन के फर्श पर बैठकर कर रहे हैं। अकेले झांसी मंडल से इन दोनों श्रेणी के कोचों में हर माह औसतन 34 लाख यात्री सफर करते हैं। वहीं, रेलवे ने एसी कोच की संख्या बढ़ा दी है।

गतिमान एक्सप्रेस, राजधानी, शताब्दी, वंदे भारत, दूरंतो, एसी स्पेशल और गरीब रथ एक्सप्रेस को छोड़ दें तो सभी सुपरफास्ट और एक्सप्रेस ट्रेनों में स्लीपर कोच होते हैं। इन्हीं, ट्रेनों के जनरल कोच में सवार होकर श्रमिक और निम्न आय वर्ग के यात्री हजारों किलोमीटर का सफर करते हैं। कुछ साल पहले तक जनरल और स्लीपर कोच में यात्रियों को बैठने की जगह मिल जाती थी, लेकिन अब स्थिति यह है कि जनरल कोच में खड़े रहने तक की जगह मिलना बड़ी जंग जीतने जैसे हो गया है।

वहीं, स्लीपर कोच की संख्या भी आधे से कम हो जाने के चलते अब वेटिंग टिकट पर यात्रा करने वाले ट्रेनों के फर्श और रास्ते में बैठकर यात्रा कर रहे हैं। इससे उन यात्रियों के लिए परेशानी खड़ी हो गई है जिन्होंने स्लीपर कोच में कंफर्म टिकट बुक कराई थी। आंकड़ों के अनुसार झांसी रेल मंडल के स्टेशनों से औसतन 28 लाख यात्री प्रतिमाह जनरल कोच का टिकट लेकर ट्रेनों में सवार होते हैं। वहीं, स्लीपर आरक्षित कोचों में यात्रा करने वालों की संख्या प्रतिमाह औसतन 6 लाख तक होती है। वहीं, एसी श्रेणी के कोचों ने स्लीपर कोच की जगह ले ली है, लेकिन आज भी लाखों यात्री इनका महंगा टिकट खरीदने की हैसियत नहीं रखते हैं।

इन ट्रेनों के स्लीपर कोचों में हैं इतनी सीटें

गोरखपुर-पनवेल एक्सप्रेस के 4 कोच में 320 सीट।

कुशीनगर एक्सप्रेस के 4 कोच में 320 सीट।

पुष्पक एक्सप्रेस के 5 कोच में 400 सीट।

तामिलनाडु एक्सप्रेस के 5 कोच में 400 सीट।

कालका एक्सप्रेस के 5 कोच में 400 सीट।

मध्य प्रदेश संपर्क क्रांति एक्सप्रेस के 5 कोच में 400 सीट।

छत्तीसगढ़ संपर्क क्रांति एक्सप्रेस के 6 कोच में 480 सीट।

भोपाल एक्सप्रेस के 5 कोच में 400 सीट।

महाकौशल एक्सप्रेस के 5 कोच में 400 सीट।

उत्कल एक्सप्रेस के 6 कोच में 480 सीट।

सचखंड एक्सप्रेस के 6 कोच में 480 सीट।

केरला एक्सप्रेस के 5 कोच में 400 सीट।

समता एक्सप्रेस के 6 कोच में 480 सीट।

वर्जन

ट्रेनों में यात्रियों की मांग को देखते हुए ही एसी कोच की संख्या बढ़ाई जाती है। त्योहारी सीजन में जनरल कोच की संख्या भी बढ़ाई जाती है। यह निर्णय रेलवे बोर्ड स्तर पर होता है।

मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी, झांसी मंडल।



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