लखनऊ। बंदियों को अदालत में पेश न करने पर अपर सत्र न्यायाधीश रविंद्र प्रसाद गुप्ता ने सख्त रुख अपनाया है। इस पर जेल अधीक्षक ने बताया कि पिछले तीन माह में 19 बार पुलिस बल की कमी के कारण बंदियों को अदालत नहीं भेजा जा सका। यह स्थिति 21 अप्रैल से 13 जुलाई के बीच बनी रही।
अदालत ने पहले ही कहा था कि गवाही के दौरान बंदी का अदालत में मौजूद होना मौलिक अधिकार है। बंदी विजय वर्मा के मामले में अदालत जेल प्रशासन और रिजर्व पुलिस लाइन को लगातार नोटिस भेज रहा है। 13 जुलाई को जारी नोटिस के जवाब में जेल अधीक्षक लखनऊ ने रिपोर्ट दी। रिपोर्ट में पुलिस बल न मिलने की बात कही गई थी। अदालत जेल अधीक्षक के इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुई। उसने फिर से नोटिस जारी कर 269 सीआरपीसी के तहत की गई कार्रवाई पूछी है।
रिजर्व पुलिस लाइन ने अदालत के नोटिस का जवाब नहीं दिया। न्यायालय ने इस स्थिति को अदालती कार्यवाही में बाधा माना है। मामले की सुनवाई के लिए 7 अगस्त की तिथि नियत की गई है। आदेश की प्रति जेल अधीक्षक, प्रतिसार निरीक्षक रिजर्व पुलिस लाइन, संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था, पुलिस आयुक्त, पुलिस महानिदेशक, अपर मुख्य सचिव गृह और मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन को भेजी गई है।
