
सावन के तीसरे सोमवार को मंदिरों में भक्तों की भीड़।
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चौक स्थित कोनेश्वर मंदिर शहर का एक ऐसा मंदिर है जहां रुद्राभिषेक में यजुर्वेद के 40 अध्याय पढ़े जाते हैं। इस रुद्राभिषेक में पूरा एक महीना लगता है। कोनेश्वर महादेव मंदिर में गुरु पूर्णिमा से चालू हुआ रुद्राभिषेक रोजाना शाम 7:30 से शुरु होकर रात के 11 बजे तक चलता है। यह रक्षा बंधन तक चलेगा। इसमें पूरी संहिता पढ़ी जाती है। अन्य रुद्राभिषेक में रुद्राष्ट्राध्यायी, शतरुद्रीय पढ़े दिए जाते हैं।
112 साल पुराना है इनका प्रदोष मंडल
शहर में कर्मकांडियों का एक ऐसा पूजा मंडल मौजूद हैं जो रुद्राभिषेक में यजुर्वेद के 40 अध्याय करवाता है। श्री विजय प्रदोष मंडल 112 वर्ष पुराना मंडल है। जिसमें कुल 25 आचार्य हैं। इस मंडल के पास शहर की सबसे ज्यादा पूजा के ऑर्डर आते हैं। ये सभी 25 आचार्य एक साथ प्रदोष पूजा, रुद्राभिषेक पूजा,शिवमहिम, रामास्थमा, मंगलसुख करवाते हैं। जब इस मंडल की शुरुआत हुई थी तब इसमें कुल 7 पंडित थे। इस मंडल की शुरुआत नरायण प्रसाद जिंगरन ने किया था।
मंडल से वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिनेश कुमार जिंगरन बताते हैं कि जब इस मंडल की शुरुआत हुई थी तब रामाधीन शास्त्री लालटेन जलाकर कोनेश्वर मंदिर की पूजा किया करते थे। धीरे-धीरे कांरवा बढ़ा और यहां तक पहुंच गया। बताया कि कोनेश्वर मंदिर से महीने का प्रति ब्राह्मण 6 हजार मानदेय तय हैं। यहां की सभी पूजा में हमारा कुनबा ही बैठता है।
हमारा मंडल देश का एकमात्र ऐसा मंडल है जो रुद्राभिषेक में यजुर्वेद के 40 अध्याय करवाता है बाकी कहीं सिर्फ शिवमहिम, रुद्राष्टम आदि करा कर ही छोड़ देते हैं। हमारे यहां क्रमश: पाठ होते हैं। इस समय सावन के चलते 24 प्रदोष, और अनगिनत रुद्राभिषेक बुक हैं। हम लोग एक महीने में 40 अध्याय पूरे कर देते हैं। कहा कि पूजा की ज्यादा मांग होने पर हम बाहर से भी आचार्य बुलवाते हैं।
ये हैं 25 आचार्य
दिनेश कुमार, कमला शंकर त्रिपाठी, रवि पांडेय, राजीव मिश्रा, राजीव मिश्रा, नित्यानंद बाजपेई, दिनेश त्रिपाठी, संजीव शर्मा, विशाल दीक्षित, संतोष कुमार मिश्रा, आकाश शुक्ला, अभिषेक मिश्रा, शिवांश मिश्रा, अर्जित अवस्थी, सुंदरम उपाध्याय, धीरेंद्र, कपिल दुबे, तन्नु पांडेय, रमाकांत शुक्ला, शिवम शु्क्ला, अमित मिश्रा, देवेश कुमार अन्य।
