सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान बड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि टैक्सी, बस और अन्य पब्लिक सर्विस वाहनों को तब तक फिटनेस सर्टिफिकेट न दिया जाए जब तक उनमें पैनिक बटन और व्हीकल ट्रैकिंग डिवाइस यानी की वीएलटीडी न लगाए जाएं। कोर्ट के अनुसार यह कदम यात्रियों खासकर बच्चें, महिला और बुजुर्ग के लिए उठाए जा रहे हैं। 

Panic Button आखिर क्या होता है?

पैनिक बटन एक इमरजेंसी सेफ्टी फीचर होता है, जिसे खतरे या आपातकालीन स्थिति में इस्तेमाल किया जाता है। जैसे मान लीजिए अगर कोई यात्री खतरा महसूस करे, हादसे का शिकार हो जाए या फिर कोई  मेडिकल इमरजेंसी आ जाए। यानी किसी भी प्रकार का संकट हो, तो इस बटन को दबाकर तुरंत मदद मांगी जा सकती है। यह बटन दबाते ही वाहन की GPS लोकेशन कंट्रोल रूम, पुलिस या इमरजेंसी सिस्टम तक पहुंच जाती है।

गाड़ियों में कहां लगाया जाता है यह बटन?

आमतौर पर यह बटन वाहन के सीट के पास, दरवाजे के आसपास या वाहन के पिलर पर लगाया जाता है, ताकि जरूरत पड़ने पर यात्री इसे तुरंत इस्तेमाल कर सके। अधिकतर मामलों में यह लाल रंग का छोटा बटन होता है, जिसे आसानी से पहचाना जा सके।


किन परिस्थितियों में इस्तेमाल करें ?

हमेशा याद रखें कि इस बटन का इस्तेमान किसी गंभीर और वास्तविक स्थिति में करें। जैसे:

दुर्घटना होने पर: अगर गाड़ी किसी सुनसान इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है और फोन का नेटवर्क नहीं है, तो फौरन इस बटन का इस्तेमाल करें, इससे समय रहते आप तक मदद पहुंच सकती है।

खतरा महसूस होने पर: अगर सफर के दौरान कोई अजनबी पीछा करे, ड्राइवर बदतमीजी करे या कोई वाहन में जबरन घुसने की कोशिश करे, तो यात्री इसे दबाकर मदद मांग सकते हैं। यह महिलाओं के लिए काफी सुरक्षित विकल्प हो सकता है।

मेडिकल इमरजेंसी: अगर ड्राइविंग के दौरान चालक या यात्री की अचानक तबीयत खराब हो जाए, तो इस बटन के जरिए एम्बुलेंस या मेडिकल टीम को तुरंत बुलाया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश सड़क सुरक्षा के क्षेत्र के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जो डिजिटल निगरानी के जरिए अपराध और हादसों पर लगाम लगाने में मदद कर सकता है। 

Vehicle Tracking Device कैसे करता है काम?

सुप्रीम कोर्ट ने व्हीकल ट्रैकिंग डिवाइस को लेकर भी निर्देश दिए हैं। आपको बता दें यह एक स्मार्ट ट्रैकिंग सिस्टम होता है, जो वाहन की लाइव लोकेशन लगातार मॉनिटर करता रहता है। यह सिस्टम सीधे कंट्रोल रूम और इमरजेंसी नेटवर्क से जुड़ा होता है। जैसे ही कोई यात्री पैनिक बटन दबाता है, वाहन की सटीक लोकेशन तुरंत संबंधित कंट्रोल सेंटर तक पहुंच जाती है। इससे पुलिस, एम्बुलेंस या सुरक्षा एजेंसियों को वाहन तक जल्दी पहुंचने में मदद मिलती है। खासकर टैक्सी, बस और कैब जैसी पब्लिक गाड़ियों में यह फीचर यात्रियों की सुरक्षा को मजबूत बनाता है।

क्या इससे सच में सुरक्षा बढ़ेगी?

अभी इसपर कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर सभी पब्लिक सर्विस वाहनों में पैनिक बटन या व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम को सख्ती से लगा दिया जाए, तो काफी हद तक सुधार देखने को मिल सकता है। हो सकता है कि इससे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्ग यात्रियों को ज्यादा सुरक्षा मिले। साथ ही अपराध और छेड़छाड़ जैसी घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है। सड़क हादसों या मेडिकल इमरजेंसी के दौरान भी राहत और मदद तेजी से पहुंचाई जा सकेगी, जिससे कई जानें बचाई जा सकती हैं।

 



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