आगरा। चुनाव आयोग संविधान से चलता है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में चुनाव कराने में चुनाव आयोग की भूमिका इतनी ही निष्पक्ष है, जितना पूर्व दिशा से सूर्य का उगना है। उसकी निष्पक्षता पर अंगुली उठाना पश्चिम से सूर्य के उगने जैसा झूठ बोलना है। यह कहना है मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का।
वह शनिवार को पंचकुइयां स्थित माथुर वैश्य भवन में संबोधन कर रहे थे। उनके सम्मान में अखिल भारतीय माथुर वैश्य महासभा के आगरा मंडलीय परिषद ने समारोह आयोजित किया था। महासभा और समाज के लोगों ने उन्हें समाज शिरोमणि सम्मान नवाजा। उनके साथ माता-पिता, पत्नी व अन्य रिश्तेदारों को भी सम्मानित किया गया।
इस समारोह में उन्होंने अपने माथुर वैश्य भवन से जुड़ाव, बचपन, ननिहाल, परिवार के इतिहास और चुनाव आयुक्त बनने तक के सफर को समाज के लोगों से साझा किया। इसके साथ ही माथुर वैश्य निर्माण में अपने पिता और परिवार के इतिहास के बारे में बताया।
महासभा राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश गुप्ता ने माथुर वैश्य महासभा की पृष्ठभूमि प्रस्तुत की और महासभा के सेवा कार्यों को विस्तार से बताया। इसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश गुप्ता मामा, शंकर गुप्ता, प्रदीप गुप्ता, विमल सराफ, संजय गुप्ता, मनोज गुप्ता, सत्यप्रकाश गुप्ता, राकेश गुप्ता, उपमा गुप्ता, विनय गुप्ता, राजेश कुमार व अन्य लोग शामिल रहे।
समाज से जुड़े बिना प्रगति संभव नहीं
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि समाज वैसे तो जन्म से अपने समाज से जुड़े होते हैं, लेकिन उससे असल मायने में वह सुंदरकांड पाठ और रामायण से जुड़े थे। पिता के गोरखपुर नौकरी के दौरान वहां समाज के छह से सात परिवार होते थे, जहां शाम को नियमित सुंदरकांड पाठ किया करते थे। जब बनारस आए तो वहां रामायण पाठ हुआ करता था। वहीं से समाज के लोगोें से असल मायने में जुड़ सका।
कामयाबी का साक्षी माथुर वैश्य भवन
उन्होंने कहा कि जब मैं 10वीं में पहले स्थान पर आया था तो माथुर वैश्य भवन में पहला सम्मान हुआ। इसके बाद 12वीं पास की तो भी यहां सम्मान हुआ। राष्ट्रीय स्तर पर तैराकी में टॉपर बना तो समाज के लोगों ने यहां सम्मानित किया। समाज के लोगों का ऋणी हूं। आज चुनाव आयुक्त बना तो भी मुझे यहां समाज ने सम्मानित किया है।
चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने बंगाल के चुनाव पर उठने वाले सवालों पर कहा कि एसआईआर के बाद चुनाव आयोग पर लोगों का विश्वास जुड़ा है। वोट वहीं करने जाता है जिसे चुनाव पर विश्वास हो। एसआईआर के बाद बिहार से लेकर बंगाल तक के चुनाव में अभूतपूर्व मतदान हुआ है। विश्व के अन्य देशों में यह नहीं हो पा रहा है।
