अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर सोमवार को पूरे प्रदेश में शिक्षकों ने टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने के लिए मशाल जलाई। शिक्षकों व कर्मचारियों ने मशाल जुलूस निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। साथ ही केंद्र सरकार को ज्ञापन भेजकर शिक्षकों को राहत देने की मांग की।
राजधानी लखनऊ में बीएन सिंह की प्रतिमा के पास से शिक्षकों ने मशाल जुलूस निकाला। नो टीईटी बिफोर आरटीई की तख्तियां लिए शिक्षकों ने 2017 में गोपनीय तरीके से किए गए टीईटी अनिवार्यता के संशोधन को निरस्त करने की मांग की। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि 25 साल की लंबी सेवा करने के बाद अब वे परीक्षा देने की स्थिति में नहीं हैं। उनके रोजगार पर लटकी तलवार को हटाया जाए। जिलों में भी शिक्षकों ने टीईटी के विरोध में मशाल जलाई।
महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडेय व विजय कुमार बंधु ने कहा कि सरकार लगातार शिक्षकों व कर्मचारियों पर अव्यवहारिक नियम थोप रही है, जिससे उनका मनोबल गिर रहा है। टीईटी की अनिवार्यता, पेंशन समाप्त करना, निजीकरण और सेवा शर्तों में लगातार हो रहे बदलाव जैसे मुद्दे आज पूरे शिक्षक व कर्मचारियों के लिए चिंता का विषय है।
विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय मणि त्रिपाठी, टीएससीटी के संस्थापक अध्यक्ष विवेकानंद ने कहा कि सरकार टेट अनिवार्यता को तत्काल समाप्त करे। पुरानी पेंशन बहाल कर शिक्षकों व कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करे। जुलूस में अनिल यादव, दिलीप चौहान, हरिशंकर राठौर, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) के प्रदेश अध्यक्ष सोहन लाल वर्मा, महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष शालिनी मिश्रा, प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनय सिंह आदि शामिल थे।
