आगरा में फाइलों के निस्तारण में होने वाली देरी को रोकने के लिए जिलाधिकारी मनीष बंसल ने मंगलवार को पत्रावलियों के निस्तारण के नियमों में बदलाव किया है। अब एक पेज पर नोटिंग का शॉर्टकट नहीं चलेगा। पूरी मूल पत्रावली मय दस्तावेज पेश होगी। भुगतान में मनमानी रोकने और तथ्य छिपाकर या आधे-अधूरे तथ्यों से फाइल हस्ताक्षर के लिए भेजने पर डीएम ने रोक लगा दी है।

विकास प्राधिकरण, नगर निगम, विकास भवन सहित जिले के 50 से अधिक विभागों के मामलों को निपटाने के लिए शॉर्टकट अपनाकर नई फाइल (पत्रावली) बनाने की प्रथा पर डीएम ने रोक लगा दी है। अधिकारियों को अब आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरी मूल पत्रावली ही डीएम के समक्ष पेश करनी होगी। प्रशासन के संज्ञान में यह बात सामने आ रही थी कि विभिन्न विभागों के अधिकारी किसी प्रकरण में पूर्व से चल रही मूल पत्रावली को प्रस्तुत करने के बजाय, एक नया पेज तैयार कर उस पर नोटिंग (टिप्पणी) लिखकर डीएम के सामने ले आते थे। इस कार्यप्रणाली के कारण मामलों से जुड़ी पुरानी और महत्वपूर्ण जानकारियां छिप जाती थीं, जिससे सही फैसले लेने में बाधा आती थी।

क्या हैं नए आदेश


मूल फाइल होगी स्वीकार: भविष्य में सभी विभाग नोडल अधिकारी के माध्यम से केवल मूल पत्रावलियां ही आवश्यक अभिलेखों के साथ समयबद्ध रूप से प्रस्तुत करेंगे।

वित्तीय मामलों में दोहरी जांच: जिन फाइलों में वित्तीय मामले शामिल हैं, वे फाइलें पहले मुख्य कोषाधिकारी से जांची जाएंगी। इसके बाद मुख्य विकास अधिकारी और अपर जिलाधिकारी की राय के साथ ही डीएम के पास पहुंचेंगी।

देना होगा लिखित प्रमाण: सबसे अहम बदलाव यह है कि अब विभागीय अधिकारियों को अपनी नोटिंग पर यह स्पष्ट रूप से लिखकर घोषणा करनी होगी कि उक्त के अतिरिक्त समविषयक कोई अन्य पत्रावली वर्तमान में पृथक से प्रचलित नहीं है।

 



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