फर्जी कागजातों और शेल कंपनियों के जरिए विभिन्न कंपनियों के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड को विदेश भेजने के मामले में आयकर विभाग ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है। विभाग ने आगरा समेत देशभर में संदिग्ध आउटवर्ड फॉरेन रेमिटेंस (विदेशी प्रेषण) की जांच और सत्यापन का अभियान शुरू किया, जिसमें 36 चार्टर्ड एकाउंटेंटों की जांच चल रही है। इनमें आगरा के ताजगंज क्षेत्र के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) भी हैं। आयकर अधिकारियों की एक टीम सीए के अलावा मथुरा के एक ट्रस्ट से जुड़े लोगों के मुंबई स्थित ठिकानों पर भी सर्वे कर रही है।
आयकर विभाग के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों के गहन विश्लेषण और खुफिया जानकारियों के आधार पर एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है। विभाग ने मथुरा में पंजीकृत एक ट्रस्ट और उससे जुड़े दो सीए समेत करीब आधा दर्जन ठिकानों पर जांच कर कई हजार करोड़ के कालेधन को विदेश भेजने का खुलासा किया था। इसी जांच में खुलासा हुआ कि फर्जी चैरिटेबल ट्रस्टों और बोगस डोनेशन के जरिए भारी मात्रा में धन विदेश भेजा जा रहा था। जिन फर्मों के खातों से यह रकम भेजी गई, उनमें से अधिकांश ने या तो अपना आयकर रिटर्न दाखिल ही नहीं किया था या फिर बेहद कम टर्नओवर दर्शाया था। फर्जी पतों पर चल रही इन कंपनियों ने सॉफ्टवेयर आयात, कंसल्टिंग और फ्रेट पेमेंट जैसे कारण बताकर विदेशी मुद्रा बाहर भेजी।
पेशेवरों की भूमिका संदिग्ध
इस पूरे खेल में फॉर्म 15 सीबी जारी करने वाले पेशेवरों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। नियमों के मुताबिक, किसी भी विदेशी भुगतान से पहले सीए को खातों की निष्पक्ष जांच और सत्यापन करना अनिवार्य होता है, लेकिन कुछ सीए ने बिना किसी उचित जांच के सर्टिफिकेट जारी कर दिए। इसी के तहत ताजगंज निवासी सीए द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों और विदेशी लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की आयकर विभाग गहनता से जांच कर रहा है। देश भर में 394 संदिग्ध इकाइयों जिनमें सीमावर्ती राज्यों की 117 इकाइयां शामिल हैं और 36 चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। सीबीडीटी की प्रवक्ता और आयकर आयुक्त (मीडिया एवं तकनीकी नीति) वी. रजिथा ने स्पष्ट किया कि फॉर्म 15CB/146 जारी करने वाले पेशेवरों को पूरी निष्ठा और पेशेवर सतर्कता से काम करना होगा।
