आम आदमी पार्टी सांसद और प्रदेश प्रभारी संजय सिंह ने कहा है कि आम आदमी पार्टी के आंदोलन और जनता के दबाव के कारण सरकार को प्रीपेड स्मार्ट मीटर योजना पर पीछे हटना पड़ा, लेकिन पोस्टपेड स्मार्ट मीटर के जरिए अभी भी जनता को लूटने का काम जारी है।

संजय सिंह ने रविवार को लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय पर प्रेसवार्ता में कहा कि उत्तर प्रदेश के गांवों और शहरों में लोग खुद स्मार्ट मीटर उखाड़कर फेंक रहे थे, महिलाओं तक ने सड़कों पर उतरकर विरोध किया। संजय सिंह ने कहा कि किसी का 600 रुपये का बिजली बिल 3000 रुपये आ रहा है, किसी का 2000 रुपये का बिल 10000 रुपये तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि “मिल्खा सिंह से तेज भागने वाले” स्मार्ट मीटरों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए और पोस्टपेड स्मार्ट मीटर के खिलाफ भी लड़ाई जारी रहेगी।

संजय सिंह ने पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं, जिला इकाइयों, प्रांतीय पदाधिकारियों और प्रकोष्ठों को बधाई देते हुए कहा कि उनके संघर्ष और प्रदेश की जनता के दबाव के कारण सरकार को पीछे हटना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है और जनता की लूट बंद होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

संजय सिंह ने शिक्षा व्यवस्था पर कहा कि नीति आयोग और भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में 9508 विद्यालय ऐसे हैं जहां केवल एक शिक्षक के भरोसे पूरा स्कूल चल रहा है। उन्होंने पूछा कि क्या एक शिक्षक के भरोसे मिड डे मील, पढ़ाई और पूरे विद्यालय का संचालन संभव है। उन्होंने कहा कि इन स्कूलों में 90 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं, जिसका अर्थ है कि गांवों की शिक्षा व्यवस्था को जानबूझकर बर्बाद किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पूरे देश में एक लाख स्कूल ऐसे हैं जहां केवल एक शिक्षक है और उनमें लगभग 10 प्रतिशत उत्तर प्रदेश में हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 30000 स्कूल ऐसे हैं जहां बिजली तक नहीं है। भीषण गर्मी में बच्चे बिना बिजली के कैसे पढ़ेंगे, इसकी किसी को चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि 98592 स्कूल ऐसे हैं जहां लड़कियों के लिए शौचालय तक की व्यवस्था नहीं है। भाजपा “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” का नारा देती है लेकिन बेटियों के सम्मान और शिक्षा की बुनियादी व्यवस्था तक उपलब्ध नहीं करा पा रही है।



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