सैंया हाईवे के पास एक होटल से चार तस्करों के कब्जे से बरामद तेंदुए की 10 खालों की अब वैज्ञानिक जांच कराई जाएगी। वन विभाग इन खालों को सोमवार को डब्ल्यूआई (वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट) भेजेगा।

डीएफओ राजेश कुमार ने बताया कि यह पता लगाया जाएगा कि खालें कितनी पुरानी हैं। नर तेंदुए की हैं या मादा की। कैसे शिकार किया गया। इन सभी बिंदुओं पर वैज्ञानिक जांच होगी। 23 जुलाई की रात वन विभाग, आगरा पुलिस और वाइल्डलाइफ एसओएस की संयुक्त टीम ने तेंदुए की खालें पकड़ी थीं। वन विभाग की टीम ने तस्करों तक पहुंचने के लिए ग्राहक बनकर करीब 20 दिन तक जानकारी जुटाई थी।

पकड़े गए चारों आरोपी अलग-अलग राज्यों के हैं। इनमें सतपाल नाथ और भगत सिंह हरियाणा के जबकि भोगीराम आदिवासी और गब्बर मध्य प्रदेश के हैं। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी अपनी असली पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग पेशे का सहारा लेते थे। एक खुद को साधु बताता था। दूसरे ने ट्रांसपोर्ट का कारोबार करने की जानकारी दी। एक आरोपी चटाई बेचता था। वन विभाग इन दावों की भी जांच कर रहा है।

हरियाणा के आरोपी करते थे डील

पूछताछ में यह भी सामने आया है कि तेंदुए की खाल की तस्करी में मध्य प्रदेश के आरोपी मुख्य रूप से खाल उपलब्ध कराते थे। हरियाणा के आरोपी डीलर की भूमिका निभाते थे। वन विभाग चारों आरोपियों की कॉल डिटेल खंगाल रहा है। अधिकारियों को आशंका है कि जांच में तस्करी से जुड़े कुछ और नाम सामने आ सकते हैं।

 



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