आगरा में ट्रांसपोर्टर असगर अली हत्याकांड में 55 दिन बाद भी पुलिस खाली हाथ है। जेल गए आरोपी रवि यादव से न तो पूछताछ हो सकी है और न ही अधिकारियों पर लगे आरोपों के बारे में कोई साक्ष्य जुटाया जा सका है। ट्रांसपोर्टर के परिजनों का आरोप है कि आरोपियों के रसूखदार होने के कारण विवेचना ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। इससे आरोपियों को बचने का मौका मिल रहा है।
मेवाती गली, शाहगंज निवासी ट्रांसपोर्टर असगर अली की 4 अप्रैल को मल्ल का चबूतरा पर कार से टक्कर मारकर हत्या कर दी गई थी। परिजन ने जीएसटी अधिकारी, उसके पति पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय यादव, उनके पुराने कार चालक, यमुनापार निवासी रवि यादव और मंटोला निवासी कामरान वारसी पर साजिश रचने का आरोप लगाया था। घटना का सीसीटीवी भी सामने आया था। हालांकि पुलिस ने अज्ञात में प्राथमिकी दर्ज की थी। पहले हादसा, बाद में हत्या की धारा लगाई।
एसीपी लोहामंडी गौरव कुमार का कहना है कि मामले में पुलिस की जांच जारी है। हत्या में प्रयुक्त कार के हादसे के बाद और पहले आने -जाने वाले मार्ग के सीसीटीवी निकाले जा रहे हैं। जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई की जाएगी।
