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जीवनशैली के साथ लोगों के खानपान में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। अब घरों में रोटी के लिए सिर्फ गेहूं के आटे पर निर्भरता नहीं रह गई है। लोग स्वाद और पसंद के अनुसार अलग-अलग अनाज और दालों से तैयार आटा भी खरीद रहे हैं। घटिया आजम खां स्थित अनाज मंडी में ग्राहकों के लिए गेहूं के साथ अन्य प्रकार का आटा भी उपलब्ध है। इनमें रागी, ज्वार, चना, सोयाबीन, बेसन, मूंग और उड़द की दाल से तैयार आटा और मक्के का आटा शामिल है।
मंडी में मल्टीग्रेन आटे की भी वैरायटी उपलब्ध है। इसे कई तरह के अनाज और दालों को मिलाकर तैयार किया जाता है। इसमें गेहूं, चना, सोयाबीन, हरी मूंग, मेथी दाना, रागी और ज्वार को मिश्रित कर आटा तैयार किया जाता है। अलग-अलग अनाजों के मिश्रण से तैयार इस आटे को ग्राहक अपनी जरूरत और पसंद के अनुसार खरीद रहे हैं। डाइटिशियन मिनी ने बताया कि किसी एक आटे को हर व्यक्ति के लिए सबसे बेहतर मानने की बजाय भोजन में विविधता रखना अधिक उपयोगी है। हालांकि, किसी विशेष बीमारी या एलर्जी की स्थिति में आटे का चयन डाइटिशियन या डॉक्टर की सलाह से करना चाहिए।
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आटा
– फोटो : अमर उजाला
40 से 100 रुपये प्रति किलो तक है दाम
व्यापारी दिनेश चंद्र अग्रवाल ने बताया कि घटिया आजम खां की अनाज मंडी में करीब 40 से लेकर 100 रुपये प्रति किलो तक में अलग-अलग तरह का आटा आसानी से मिल जाता है। इसकी कीमत अनाज के मिश्रण के आधार पर अलग-अलग होती है। ग्राहकों के लिए जरूरत और बजट के अनुसार कई विकल्प उपलब्ध हैं।
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व्यापारी
– फोटो : अमर उजाला
कोविड के बाद बढ़ी मल्टीग्रेन आटे की मांग
व्यापारी पुनीत का कहना है कि कोविड के समय से ही सबसे अधिक मल्टीग्रेन आटे की मांग है। कई लोग स्वाद में बदलाव के लिए ज्वार, मक्का और रागी का आटा खरीदते हैं, जबकि कुछ ग्राहक चना, सोयाबीन और दालों से तैयार आटे को भी अपनी दैनिक जरूरत के अनुसार इस्तेमाल कर रहे हैं।
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रागी का आटा
– फोटो : Adobe Stock
अलग-अलग आटा, सेहत के लिए विभिन्न फायदे
डाइटिशियन मिनी शर्मा बताती हैं कि संतुलित मात्रा में सेवन से मिल सकते हैं कई पोषक लाभ
1- रागी का आटा: कैल्शियम और फाइबर का अच्छा स्रोत माना जाता है।
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ज्वार का आटा
– फोटो : Adobe Stock
2- ज्वार का आटा: फाइबर से भरपूर होने के कारण पाचन के लिए उपयोगी हो सकता है।