जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन के बाद देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के 47 अधिकारी बर्खास्त किए गए। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। आजाद भारत में राज्यों और केंद्र की सरकार के खिलाफ जब-जब छात्रों ने आंदोलन किए, तब-तब उनकी आवाज को कोई सरकार दबा नहीं सकी। हर बार छात्रों ने अपने आंदोलन से सत्ता को झुका दिया। हर बार सरकार को उनकी मांगों को मानने के साथ बैकफुट पर आना पड़ा। खासकर तब, जब छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागे गए।


अमर उजाला आर्काइव के पुराने पन्नों में दर्ज है कि आजादी के बाद नवंबर में लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों ने आंदोलन शुरू किया। उनके समर्थन में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र भी आ गए। कानपुर और लखनऊ में बसें जलाई गईं। 3 नवंबर, 1953 को छात्रों की पिटाई के साथ बसें जलाने की खबर प्रकाशित की गई थी। 10-10 साल के बच्चों ने कांग्रेस नेताओं की जमकर पिटाई की थी।

 



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *