मुहर्रम की सातवीं तारीख पर मंगलवार को अंजुमन-ए-पंजतनी, शाहगंज की ओर से चिल्लीपाड़ा पुराने इमामबाड़े से अलम का जुलूस निकाला गया। अमीर अहमद के कदीमी नौहे जैनब लिपट के रोईं अब्बास के अलम से…कर्बला के जंगलों में शाह का घराना है, तीन दिन के प्यासों को रोने का जमाना है…के साथ आगाज हुआ तो हर आंख नम हो गई। या सकीना..या अब्बास की सदाएं गूंज उठीं। काले लिबास में सीनाजनी करते हुए लोग हजरत अब्बास की शहादत का गम मना रहे थे। नौजवानों ने जंजीर और कमां से अपने नंगे बदन को लहूलुहान कर लिया।


शाहगंज गांधी चौक से जुलूस बाहर निकला तो बशारत अली सैफ़ ने नौहा पेश किया, जिस पर नौजवानों ने ज़बरदस्त मातम किया। शाहे करबला लीजिए सलाम लेके आए हैं आपके गुलाम.. नौहे के साथ सीनाजनी करते हुए आगे बढ़े। जुलूस में शामिल सभी अज़ादार काले लिबास में नंगे पांव चलते रहे। शाहगंज चौराहे पर अजादारों ने जंजीर (छुरियों) का मातम करके इमाम हुसैन व करबला के शहीदों को नजराना-ए-अकीदत पेश किया। जंजीर के मातम की सदा राहिब जाफरी व मुहम्मद अब्बास जाफ़री ने पेश की।

 



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