डिजिटल अरेस्ट, निवेश के नाम पर ठगी, फिशिंग लिंक, फर्जी कस्टमर केयर, सोशल मीडिया हैकिंग, एआई आधारित डीपफेक एवं वॉइस क्लोनिंग, ऑनलाइन गेमिंग…। साइबर अपराधी इन्हीं तरीकों से लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। इनसे बचने के लिए लोगों को जागरूक रहने की जरूरत है। पुलिस को भी नई-नई तकनीक से दक्ष रहना होगा। यह बात सोमवार को पुलिस लाइन के शहीद प्रशांत मेमोरियल सभागार में साइबर जागरूकता कार्यशाला में पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने कही। कार्यशाला में साइबर अपराध के बदलते स्वरूप, अपराधियों की कार्यप्रणाली, डिजिटल जांच की चुनौतियों और बचाव के व्यावहारिक उपायों पर प्रशिक्षण दिया गया। साइबर एक्सपर्ट ने बताया कि साइबर अपराध की रोकथाम में जन-जागरूकता सबसे प्रभावी माध्यम है।




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