आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर ऑन ड्यूटी डीएसएस नरेंद्र सिंह चाहर की पिटाई और उन्हें घसीटकर आरपीएफ पोस्ट ले जाने के मामले में रेलवे सुरक्षा बल के चीफ कमांडेंट के निर्देश पर निलंबित चारों आरपीएफ कर्मियों को प्रयागराज और झांसी मंडल के आरपीएफ पोस्ट से संबद्ध किया गया है। उधर, घटना की जांच कर रही तीन सदस्यीय कमेटी बृहस्पतिवार को आरोपियों और अन्य संबंधित कर्मचारियों के बयान दर्ज नहीं कर सकी, जबकि कर्मचारी संगठनों का विरोध भी जारी रहा।

एएसआई मेघराज मीणा को रेलवे सुरक्षा बल पोस्ट ललितपुर (झांसी मंडल), एएसआई बालकिशन मीणा को रेलवे सुरक्षा बल पोस्ट फतेहपुर (प्रयागराज मंडल), हेड कांस्टेबल बादाम सिंह को रेलवे सुरक्षा बल पोस्ट चित्रकूट कर्वी (झांसी मंडल) तथा कांस्टेबल जितेंद्र सिंह को रेलवे सुरक्षा बल पोस्ट मानिकपुर (प्रयागराज मंडल) से संबद्ध किया गया है। यह चारों कर्मचारी पहले से निलंबित चल रहे हैं।

आगरा मंडल के जनसंपर्क अधिकारी संजय कुमार गौतम ने बताया कि चीफ कमांडेंट के आदेश पर निलंबित चारों आरपीएफ कर्मियों को अलग-अलग पोस्टों से अटैच किया गया है। इस बीच ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर एसोसिएशन और रेलवे कर्मचारियों का विरोध लगातार जारी है। वहीं नॉर्थ सेंट्रल रेलवे इंप्लाइज संघ ने प्रस्तावित प्रदर्शन फिलहाल टाल दिया। पूरे दिन कैंट रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ चीफ कमांडेंट राजमोहन पिचाई के तबादले की चर्चाएं भी होती रहीं। साथ ही यह चर्चा भी रही कि डीएसएस की बहन के ट्रैक पर लेटने के मामले में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, हालांकि जनसंपर्क अधिकारी संजय कुमार गौतम ने इसकी पुष्टि करने से इन्कार किया।

बयान दर्ज नहीं कर सकी जांच कमेटी

घटना की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय कमेटी को सुबह 11 बजे डीआरएम कार्यालय में आरोपियों, प्रत्यक्षदर्शियों और रेलवे कर्मचारियों के बयान दर्ज करने थे। टीम के दो सदस्य मौके पर पहुंच भी गए थे, लेकिन इसी दौरान आरपीएफ के चीफ कमांडेंट एवं जांच समिति के सदस्य राजमोहन पिचाई को प्रयागराज मुख्यालय बुला लिया गया। इसके बाद काफी देर तक इंतजार करने के बाद बयान दर्ज करने की प्रक्रिया स्थगित कर दी गई और सभी संबंधित लोगों को वापस भेज दिया गया।

यह था मामला

रविवार को कैंट स्टेशन पर डीएसएस नरेंद्र सिंह चाहर ने हीराकुंड एक्सप्रेस को एक महिला यात्री के लिए रुकवा दिया था। इसी पर आरपीएफ कर्मियों ने विवाद के बाद उनकी पिटाई की थी और घसीटकर आरपीएफ थाना (पोस्ट) ले गए थे। वीडियो वायरल होने के बाद रेल संगठनों ने इस पर कड़ा एतराज जताया था। दो दिन तक कैंट स्टेशन व डीआरएम दफ्तर पर हंगामा व घेराव किया गया था। इसके बाद आरपीएफ कर्मियों को निलंबित करके उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। जीआरपी ने भी खानापूरी करके आरपीएफ कर्मियों की जगह पिटाई में मदद करने वाले लपकों को जेल भेज दिया।



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