स्थिति यहीं नहीं थमी। जैसे ही मरीजों को इमरजेंसी में ले जाया गया, अचानक बिजली गुल हो गई और पूरा परिसर अंधेरे में डूब गया। करीब तीन से चार मिनट तक हालात ऐसे ही बने रहे। इससे अफरा-तफरी का माहौल हो गया। इस दौरान यह बताने वाला भी कोई मौजूद नहीं था कि मरीजों को कहां लिटाया जाए और किस प्रकार उपचार शुरू किया जाए।
परिजनों का आरोप है कि मेडिकल कॉलेज में मौजूद डॉक्टरों का रवैया भी संतोषजनक नहीं रहा और इलाज की प्रक्रिया में समुचित समन्वय का अभाव दिखाई दिया। घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय और पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह मौके पर पहुंच गए और हालात का जायजा लिया। हालांकि गंभीर स्थिति के बावजूद मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य अरविंद त्रिवेदी के मौके पर न पहुंचने पर अधिकारियों ने भी नाराजगी जताई।
इस पूरे घटनाक्रम ने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद जहां एक ओर घायलों की जिंदगी बचाने की जद्दोजहद चल रही थी, वहीं दूसरी ओर व्यवस्थाओं की कमी ने हालात को और भी चिंताजनक बना दिया।
उरई में श्रद्धालुओं की कार डंपर में घुसी, आठ की मौत… दो गंभीर
अयोध्या से प्रतिमा विसर्जित कर ललितपुर जा रहे श्रद्धालुओं की तेज रफ्तार कार सोमवार सुबह कालपी में आगे जा रहे डंपर में जा घुसी। हादसे में कार सवार आठ लोगों की मौत हो गई। दो गंभीर घायलों को कानपुर के हैलट अस्पताल रेफर किया गया है। हादसे की वजह 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार और कार चालक को झपकी आना बताया जा रहा है।




