श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की दान पेटिका से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) सोमवार दोपहर करीब 2:50 बजे अयोध्या पहुंची थी। टीम ने पहुंचते ही मामले से जुड़े दस्तावेजों, अभिलेखों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी।
शासन की ओर से एसआईटी को सात दिन में प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिन में अंतिम रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। वहीं, आज फिर दोबारा एसआइटी टीम राम मंदिर पहुंची है। यहां पर वो मंदिर के पुजारियों, ट्रस्ट के पदाधिकारियों और पकड़े गए संदिग्धों से पूछताछ करेगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से गठित एसआईटी के अयोध्या पहुंचने के बाद मंदिर परिसर से लेकर संत-महंतों के आश्रमों और श्रद्धालुओं के बीच एक ही चर्चा है कि जांच में क्या सामने आएगा और दोषियों पर क्या कार्रवाई होगी। हालांकि, पूरे घटनाक्रम के बीच अधिकतर लोगों का मानना है कि यह मामला मंदिर की आस्था का नहीं, बल्कि व्यवस्था की पारदर्शिता का है।
राम मंदिर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में इस जांच को केवल एक वित्तीय अनियमितता की जांच नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास को और मजबूत करने की प्रक्रिया के रूप में भी देखा जा रहा है। अयोध्या में फिलहाल माहौल शांत है, लेकिन हर किसी को एसआईटी की रिपोर्ट का इंतजार है।
धर्म सेना प्रमुख ने दी तहरीर, एफआईआर न दर्ज होने पर कोर्ट जाने की चेतावनी
श्रीराम जन्मभूमि परिसर की दानपेटिका में कथित अनियमितता और चढ़ावे की चोरी के आरोपों को लेकर धर्म सेना प्रमुख एवं पूर्व शिवसेना नेता संतोष दुबे मंगलवार को थाना राम जन्मभूमि पहुंचे और पुलिस को तहरीर सौंपी। उन्होंने चार नामजद सहित कई अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
संतोष दुबे ने कहा कि रामभक्तों के चढ़ावे में अनियमितता की खबरों से श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। दुबे ने चेतावनी दी कि यदि पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं करती है तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
उन्होंने बताया कि विरोध स्वरूप बुधवार को सरयू तट पहुंचकर सरयू नदी को तहरीर अर्पित की जाएगी। उनका कहना है कि रामभक्तों के दान से जुड़े मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना आवश्यक है तथा दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
