पान मसाला उद्योग के लिए प्लास्टिक सैशे और मेटलाइज्ड पैकेजिंग पर प्रस्तावित रोक को लेकर उद्योग संगठनों ने सरकार से समान नीति लागू करने की मांग की है। कारोबारियों का कहना है कि देश में खाद्य और एफएमसीजी सेक्टर में हर साल करीब 7 से 10 लाख मीट्रिक टन मल्टीलेयर प्लास्टिक और मेटलाइज्ड पैकेजिंग सामग्री इस्तेमाल होती है, जबकि पान मसाला उद्योग की हिस्सेदारी इसमें केवल 35 से 40 हजार टन यानी लगभग 3 से 5 प्रतिशत ही है। ऐसे में सिर्फ पान मसाला उद्योग पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं माना जा सकता।

गौरतलब है कि भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक (पैकेजिंग) विनियम 2018 में संशोधन का प्रस्ताव जारी किया है। इसके तहत पान मसाला, गुटखा और तंबाकू उत्पादों की बिक्री केवल पेपर, पेपर बोर्ड, सेलूलोज या अन्य प्राकृतिक सामग्री आधारित पैकेजिंग में करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही पॉलीथीन, पीवीसी, लैमिनेटेड और मेटलाइज्ड सैशे पर रोक लगाने की तैयारी है।

 



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