चंद्रभान यादव, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: Akash Dwivedi

Updated Sat, 11 Jul 2026 11:40 AM IST

प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं ने बिना पूर्व सूचना बिजली भार बढ़ाने और फिक्स चार्ज अधिक वसूलने पर आपत्ति जताई है। भार घटाने की प्रक्रिया जटिल होने से उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है। ऊर्जा विभाग का कहना है कि संसाधन प्रबंधन के लिए यह व्यवस्था आवश्यक है, जबकि उपभोक्ता संगठन पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।


UP Allegation of arbitrariness in increasing the electricity load, even if the load is reduced somehow, only

बिजली बिल बढ़ेगा।
– फोटो : अमर उजाला नेटवर्क



विस्तार

प्रदेश का ऊर्जा विभाग सरेआम उपभोक्ताओं की जेब काट रहा है। हालत यह है कि बिजली का भार तीन माह की रीडिंग के आधार पर अपने आप बढ़ा दिया जाता है, लेकिन घटाने के लिए उपभोक्ताओं को उपकेंद्रों के चक्कर काटने पड़ते हैं। इतना ही नहीं किसी तरह भार घटा तो भी फिक्स चार्ज 75 फीसदी ही कम होगा।प्रदेश में 3.73 करोड़ बिजली उपभोक्ता हैं। सालभर में तीन माह अधिकतम खपत के आधार पर बिजली भार बढ़ाया जाता है। 


भार बढ़ाने से पहले सूचना देने का नियम है, लेकिन ज्यादातर उपभोक्ताओं की शिकायत है कि बिना सूचना दिए ही भार बढा दिया गया। जब बिल जारी होता है तो भार बढ़ाने संबंधी जानकारी मिलती है। दूसरी तरफ जब सर्दी के मौसम में भार कम होता है तो उसे अपने आप घटाने की जहमत नहीं उठाई जाती है। भार घटाने के लिए उपभोक्ताओं को आवेदन करना पड़ता है। सबूत देना पड़ता है और कई बार उपकेंद्रों के चक्कर काटने पड़ते हैं। फिर भी मीटर रीडर ने संस्तुति नहीं दी तो भार घटता नहीं है।

 



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