बिजनौर के अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में रेक्यू के दौरान पिछले पैरों से चलने में असमर्थ मिली बाघिन इलाज के आभावा में दम तोड़ दिया। जब बाघिन को इलाज की सबसे ज्यादा जरूरत थी तो वहां के अधिकारियों ने उसका इलाज न कराकर सैकड़ों किलोमीटर दूरी से कानपुर चिड़ियाघर के लिए बिना पशु चिकित्सक के रेस्क्यू ट्रक से पिंजड़े में बंदकर रवाना कर दिया गया। करीब 24 घंटे तक बंद पिजड़े में रहकर लंबा सफर वह झेल नहीं सकी और कानपुर चिड़ियाघर पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। तीन सदस्यी डॉक्टरों की टीम ने उसका पोस्टमार्टम कर शव जलाया और बिसरा जांच के लिए बरेली भेजा गया है।
बाघिन को एक सप्ताह से खाना तक नहीं मिला
चिडि़याघर के डॉक्टर नासिर ने बताया कि पोस्टमार्टम के दौरान बाघिन का पेट पूरा खाली मिला। यानी बाघिन को करीब एक सप्ताह से खाना नहीं मिला। लकवा मारने के कारण वह चलने में असमर्थ थी जिसकी वजह से जंगल में कोई शिकार नहीं कर सकी। उसके दांत पूरी तरह से घिसे थे जिससे उसकी उम्र करीब 14 वर्ष की होने का अंदाजा लगाया गया। किडनी खराब हो गईं थी। फेफड़े सिकुड़ गए थे।
