हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी।
Published by: Pragati Chand

Updated Mon, 18 May 2026 11:57 AM IST

Varanasi News: बीएचयू के प्रोफेसरों से जुड़े रिसर्च पेपर एआई टूल से तैयार किए जाने का आरोप लगाया गया है। वहीं आरोप है कि माइक्रोस्कोप से ली गई तस्वीरों में हेरफेर की गई थी। 

 


Allegations of AI Assistance and Photo Manipulation in Research Papers Linked to BHU Professors

बनारस हिंदी विश्वविद्यालय, BHU
– फोटो : X (@bhupro)



विस्तार

पिछले पांच साल में बीएचयू के प्रोफेसरों से जुड़े करीब 75 से ज्यादा रिसर्च पेपर अंतरराष्ट्रीय जर्नल से बाहर हो गए हैं। संयुक्त रूप से शोध किए गए विद्वानों पर आरोप है कि कई रिसर्च पेपर एआई टूल से तैयार किए गए थे। माइक्रोस्कोप से ली गई तस्वीरों में हेरफेर की गई थी। 

प्लेगरिज्म (कॉपी-पेस्ट), डुब्लीकेट डेटा, अधिकारों के विवाद जैसी गड़बड़ी के बीच रिसर्च पेपर छापे गए थे। वर्ष 2022, 2023, 2024 और 2025 में सबसे ज्यादा शोध पत्रों में सबसे ज्यादा 63 गड़बड़ियां आई हैं। 2026 का डेटा नहीं जारी किया गया है लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि एआई के आने के बाद कई जर्नल की ओर से रिसर्च पेपरों की जांच-पड़ताल में इससे ज्यादा दिक्कतें आ सकती हैं। 

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ये सभी रिसर्च पेपर रिट्रैक्शन वाच, नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के सेंटर ऑफ बायो टेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन सहित कई जर्नल में सार्वजनिक किए गए हें। इनकी वेबसाइट पर भी इन रिसर्च पेपरों को देखा जा सकता है। इनमें बीएचयू के शोध पत्रों के साथ ही वे भी रिसर्च शामिल हैं जिनमें बीएचयू के वैज्ञानिक या सदस्यों को पेशोधकर्ता के तौर पर शामिल किया गया है।



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