बेमौसम आए आंधी-तूफान और बूंदाबांदी ने आम किसानों को बेजार कर दिया है। प्रदेशभर में करीब 40 से 50 फीसदी आम की फसल को नुकसान हुआ है। एक तरफ किसान सिसक रहे हैं, वहीं कम उत्पादन की बजह से आम का स्वाद महंगा साबित होगा। हालांकि उद्यान विभाग किसानों के दर्द को कम करने की कोशिश में लगा है।

राजधानी की फलपट्टी मलिहाबाद के गांवों का रास्ता बागों से गुजरता है। बृहस्पतिवार को हम काकोरी पहुंचे तो बाग में तने तिरपाल के नीचे चारपाई पर लेटे किसान अमरजीत सिंह मिले। बोले, हर साल एक एकड़ में करीब 90 से 100 क्विंटल आम निकलता था। यदि मूल्य 30 रुपये किलो रहा तो तीन लाख मिलते थे। खर्चा काट कर करीब डेढ़ से दो लाख रुपये बचते थे। इस बार आधी रकम मिलना भी मुश्किल है। सोचा था कि घर की मरम्मत कराएंगे, लेकिन अब संभव नहीं है।

ये भी पढ़ें – महंगाई का तगड़ा झटका : लखनऊ में शुक्रवार सुबह से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े, सीएनजी भी महंगी हुई



ये भी पढ़ें – यूपी के एडेड स्कूलों में 23 हजार शिक्षकों-प्रधानाचार्यों की होगी भर्ती, प्रवक्ताओं व सहायक अध्यापक के पद भी भरे जाएंगे

कुसमौरा के बाग में मिले विपिन मौर्य ने बताया कि किराये पर बाग लेते हैं। इस बार करीब 70 लाख रुपये खर्च किए हैं। अबकी बार लागत निकलनी मुश्किल है। उन्होंने बताया कि प्रति बीमा बाग का किराया 45 से 50 हजार। दवा छिड़काव, मजदूरी, बैग बांधने और तोड़ाई आदि का खर्चा 30 से 35 हजार है। कुल खर्चा करीब 80 हजार लगता है। इस बार लागत निकलना मुश्किल है। कहा कि बौर आते ही तूफान आया। रिमझिम फुहारें पड़ीं। रोग लग गया। खराब फलों को हटाकर बचे फल में बैग बंधवा रहे हैं। करीब दस साल से बागों में काम करने वाले मुनऊ बताते हैं कि पांच साल पहले ऐसे ही हालात थे।

अब गर्मी की जरूरत है तो नमी बनी हुई है: मौसम का बदलाव आम के लिए जहर बन गया है। कुछ ऐसी ही बात आसपास के बागवान समौर सिंह, विपिन शंकर शुक्ला आदि भी बताते हैं। मलिहाबाद में बने औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र के विशेषज्ञ डॉ. सचिन आर्या कहते हैं कि मौसम ने नुकसान किया। पहले भुनगा फिर थ्रीप्स का अटैक रहा। यह सूक्ष्म कीट बऔर (फूल) और नई पत्तियों को नुकसान पहुंचाता है। इसे नियंत्रित करने के लिए इमिडाक्लोप्रिड या फिप्रोनिल का स्प्रे करना होता है। इससे लागत बढ़ गई।

– 3.25 लाख हेक्टेयर है उत्तर प्रदेश में आम की बागवानी

– 4383 रुपये प्रति क्विंटल रहा है पिछले वर्ष आम का औसम भाव।

– 61 लाख मीट्रिक टन के आसपास होता है हर साल आम का उत्पादन।

– 13 आम पट्टी उत्तर प्रदेश में।

– 400 मीट्रिक टन होता है निर्यात। हर साल इसमें बढ़ोतरी हो रही है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *