शिक्षक बनने का सपना अधूरा रहने के बाद यशस्वी के भीतर खाकी वर्दी पहनने की इच्छा जगी। उसने दरोगा भर्ती परीक्षा की तैयारी शुरू की और पिछले महीने हुई परीक्षा में शामिल भी हुई। हालांकि, सट्टेबाजी प्रकरण में नाम सामने आने के बाद उसका यह सपना भी टूट गया। गिरफ्तारी के बाद उसने पुलिसकर्मियों से कहा कि जो उसे पत्नी का दर्जा नहीं दिला सका, उसने आखिरकार जेल पहुंचा दिया।
पुलिस अब यशस्वी के बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की जांच में जुटी है। आशंका है कि सट्टा गिरोह से जुड़ी रकम और संपत्ति उसके माध्यम से ठिकाने लगाई जाती थी। पुलिस इस पहलू की भी पड़ताल कर रही है।
झांसी छोड़कर भागने की थी तैयारी
सट्टा मामले में वांछित सुमित साहू की तलाश में पुलिस राजीव नगर स्थित उसके घर पहुंची थी। वहां सुमित नहीं मिला, लेकिन उसकी दोस्त निशा खान के बारे में जानकारी मिली। पुलिस के मुताबिक, निशा ने ही बताया कि यशस्वी नकदी लेकर झांसी छोड़ने की तैयारी में है। इसके बाद पुलिस रॉयल सिटी स्थित फ्लैट पहुंची, जहां रजत और यशस्वी दोनों मौजूद मिले। पुलिस ने वहां से नकदी और सोने के जेवर बरामद किए। सूत्रों का कहना है कि पैसों के बंटवारे को लेकर निशा और यशस्वी के बीच विवाद हुआ था, जिसके बाद पुलिस को सुराग मिला और पूरे मामले का खुलासा हो गया।




