हाथरस नगर क्षेत्र के संविलियन विद्यालय दयानतपुर में 16 जुलाई की सुबह शिक्षा व्यवस्था की हकीकत चौंकाने वाली दिखी। यहां पहली से छठवीं तक की छह कक्षाओं के करीब 40 बच्चों को एक ही कमरे में बैठाकर पढ़ाया जा रहा था, जबकि सातवीं और आठवीं की कक्षाएं खुले मैदान में पेड़ के नीचे संचालित हो रही थीं।

जर्जर भवन को ध्वस्त किए जाने के कारण विद्यालय में पर्याप्त कक्ष उपलब्ध नहीं हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है।सुबह 9:05 बजे जब संवाद न्यूज एजेंसी की टीम विद्यालय पहुंची तो यहां एक ही कमरे में पहली से छठवीं तक के छात्र-छात्राएं बैठे मिले। तीन शिक्षिकाएं एक साथ सभी कक्षाओं को पढ़ाने का प्रयास कर रही थीं। अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों की एक साथ पढ़ाई होने से यहां शिक्षण कार्य के नाम पर लकीर पिटती दिखाई दी।

विद्यालय परिसर में जर्जर भवन को गिराने का कार्य चल रहा है। इसी वजह से सातवीं और आठवीं के विद्यार्थियों की कक्षाएं खुले मैदान में पेड़ की छांव में लगाई जा रही हैं। बच्चों ने बताया कि बारिश होने पर सभी कक्षाओं को उसी एक कमरे में समेट दिया जाता है, जिससे पढ़ाई लगभग ठप हो जाती है। खुले परिसर में निराश्रित गोवंशों के आने का खतरा भी बना रहता है, जिससे छात्र-छात्राएं असुरक्षित महसूस करते हैं। यह स्थिति केवल दयानतपुर के विद्यालय तक सीमित नहीं है। जिले के कई परिषदीय विद्यालयों में जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण के बाद पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने से खुले आसमान के नीचे कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।


भवन निर्माण के लिए शासन को बजट के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। कक्षाओं का संचालन कराना प्राथमिकता है। बच्चों की पढ़ाई के लिए समुचित व्यवस्था कराई जा रही है।-रणवीर सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।




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