राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को दो अहम राहत दी हैं। वित्त विभाग ने अवकाश यात्रा सुविधा (एलटीसी) के नियमों में बदलाव करते हुए 15 दिन का अर्जित अवकाश लेना अनिवार्य होने की व्यवस्था खत्म कर दी है। इसके साथ ही एलटीसी के दौरान स्वीकृत अधिकतम 10 दिन के अर्जित अवकाश के नकदीकरण की सुविधा भी मंजूर कर दी गई है। वहीं, कर्मचारियों को मिलने वाली शिक्षा संबंधी सहायता के लिए पात्रता को संशोधित वेतन मैट्रिक्स के लेवल-3 तक बढ़ा दिया गया है। सरकारी कर्मचारियों के दिव्यांग बच्चों की शिक्षण शुल्क प्रतिपूर्ति की सीमा भी दोगुनी कर 600 रुपये प्रतिमाह प्रति बच्चा कर दी गई है।
वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार की ओर से जारी दोनों शासनादेशों में ये फैसले वेतन समिति-2016 की सिफारिशों पर विचार के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति के निर्णय के आधार पर किए गए हैं। शासनादेश के मुताबिक, अब अवकाश यात्रा सुविधा का लाभ लेने के लिए कर्मचारी को न्यूनतम 15 दिन के अर्जित अवकाश का उपयोग करना अनिवार्य नहीं होगा। यह बाध्यता समाप्त कर दी गई है। इससे कर्मचारी बिना 15 दिन का अर्जित अवकाश लिए भी एलटीसी का लाभ ले सकेंगे।
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इसके अलावा एलटीसी के लिए स्वीकृत अर्जित अवकाश, अधिकतम 10 दिन तक, के नकदीकरण की सुविधा भी राज्य कर्मचारियों को दी गई है। शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि पहले राज्य सरकार के कर्मचारियों को केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तरह एलटीसी के दौरान अवकाश नकदीकरण की सुविधा अनुमन्य नहीं थी। अब यह सुविधा तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। एलटीसी से जुड़ी अन्य शर्तें और प्रतिबंध पहले की तरह लागू रहेंगे।
शिक्षा सहायता के दायरे में अब लेवल-3 तक के कर्मचारी
दूसरे शासनादेश में शिक्षा संबंधी सहायता के नियमों में बदलाव किया गया है। पहले 2006 के पुनरीक्षित वेतनमान में ग्रेड वेतन 2000 रुपये प्रतिमाह तक के पदों पर तैनात कर्मचारियों को दो बच्चों तक के शिक्षण शुल्क संबंधी शैक्षिक सहायता की सुविधा थी। अब संशोधित वेतन मैट्रिक्स में मैट्रिक्स लेवल-3 तक के पदों पर तैनात राजकीय विभागों के कर्मचारियों को यह सहायता अनुमन्य होगी। इसके लिए वर्ष 2002 के शासनादेश में निर्धारित शर्तें और प्रतिबंध लागू रहेंगे।
दिव्यांग बच्चों की फीस प्रतिपूर्ति दोगुनी
सरकारी कर्मचारियों के दिव्यांग बच्चों के शिक्षण शुल्क की प्रतिपूर्ति के लिए पहले 300 रुपये प्रतिमाह प्रति बच्चा की दर तय थी। सरकार ने इसे बढ़ाकर 600 रुपये प्रतिमाह प्रति बच्चा कर दिया है। संशोधित दर तत्काल प्रभाव से लागू होगी।
