सावन के पहले सोमवार को जहां वृंदावन में शिवालयों में धूम रही तो वहीं ठाकुर श्रीबांकेबिहारी के दर्शन के लिए भी भक्तों का सैलाब उमड़ा। ठाकुरजी को नीले रंग की भव्य पोशाक पहनाई गई। उनके सिंहासन के पीछे फूलों का शेषनाग बनाया गया, जिस पर ठाकुर जी को विराजित किया गया। ठाकुरजी के शेषनाग पर दर्शन कर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। यहीं कुछ लोगों ने कहा कि पहले तो ठाकुर जी चांदी के शेषनाग पर विराजे थे लेकिन इस उन्हें फूलों पर विराजमान किया गया। इससे पूर्व जगन्नाथ रथयात्रा में ठाकुरजी को चांदी के रथ की जगह फूलों के रथ पर विराजमान किया गया था।
आनंद निकुंज चैरिटेबिल ट्रस्ट ने कराया था निर्माण
विशाल चांदी के शेषनाग सिंहासन का निर्माण चंद्र आनंद निकुंज बिहारी चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रयास व भक्तों के सहयोग से किया गया था। शेषनाग में करीब 80 किलो चांदी और 200 किलो लकड़ी का प्रयोग किया गया था। वर्ष 2019 के श्रावण मास में इसी पर ठाकुर श्रीबांकेबिहारी को विराजमान किया गया।
यह बोले सेवाधिकारी
सेवाधिकारी प्रणव गोस्वामी का कहना है कि उनकी सेवा में अद्भुत फूल बंगला सजाया गया। सेवाधिकारी अपने हिसाब से ठाकुरजी का शृंगार करते हैं। चांदी का शेषनाग ज्ञानेंद्र गोस्वामी का है। वह अपनी सेवा के दौरान ही उसे लेकर आते हैं।
ऐसी कोई परंपरा नहीं है : ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी
सेवायत ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी का कहना है कि चांदी के शेषनाग पर ठाकुरजी को विराजित करने की कोई परंपरा नहीं है। उनके ट्रस्ट को भक्तों ने चांदी का शेषनाग सेवा के लिए दान में दिया है, लेकिन वह काफी भारी है और बड़ा है। यहां अब रेलिंग लगी होने के कारण उसे अंदर नहीं ले जाया जा सकता था।
श्रीबांकेबिहारी मंदिर हाईपावर्ड कमेटी के अध्यक्ष अशोक कुमार ने बताया कि इस मामले की मुझे जानकारी नहीं है। चांदी के शेषनाग के बारे में पता किया जाएगा। वह किसका है और क्या परंपरा का हिस्सा है, इसके बारे में पूछा जाएगा।
