उरई में डकोर ब्लॉक के कुसमिलिया गांव में लगी आग ने सिर्फ घर नहीं जलाए, बल्कि दर्जनों परिवारों के सपनों, उम्मीदों और बरसों की मेहनत को भी राख कर दिया। गांव में करीब 20 घर आग की चपेट में आ गए। किसी का अनाज जला, किसी की जमा पूंजी, तो किसी का पशुधन और बच्चों की किताबें तक आग में स्वाहा हो गईं।

सबसे ज्यादा पीड़ा लोगों को इस बात की है कि सूचना देने के करीब एक घंटे बाद दमकल की गाड़ियां गांव पहुंचीं, तब तक सबकुछ खत्म हो चुका था। ग्रामीणों का कहना है कि उरई से कुसमिलिया गांव की दूरी महज 10 किलोमीटर है, लेकिन दमकल विभाग को पहुंचने में करीब एक घंटा लग गया।




Orai Fire Tragedy Lives Burned Through Night Firefighters Arrived After Hour Everything Turned to Ash

Orai Fire Accident
– फोटो : amar ujala


रातभर गांव में चीख-पुकार मची रही

इस बीच गांव वाले बाल्टी, ड्रम और समरसेबल के सहारे आग बुझाने की कोशिश करते रहे, मगर तेज हवा के सामने उनकी कोशिशें बेबस साबित हुईं। रातभर गांव में चीख-पुकार मची रही। कोई अपने घर से अनाज निकालने में जुटा था, तो कोई बच्चों को आग से बचाने में। महिलाएं सिर पकड़कर रोती रहीं और पुरुष जलते घरों के सामने असहाय खड़े रहे।


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सुबह आग पूरी तरह शांत हुई

आग इतनी भीषण थी कि लोग अपने घरों में रखा सामान तक नहीं बचा सके। सुबह जब आग पूरी तरह शांत हुई और धुआं छंटा, तब गांव वालों ने अपने उजड़े आशियानों को देखा। राख के ढेर में तब्दील घरों के सामने खड़े लोग बिलख-बिलख कर रोने लगे। किसी के बर्तन राख हो गए, किसी की चारपाई, किसी की नकदी और किसी की जिंदगीभर की कमाई।


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इलाज के लिए रुपये जोड़कर रखे थे, सब जल गया

उमा देवी रोते हुए कहती हैं कि इलाज के लिए डेढ़ लाख रुपये जोड़कर रखे थे, सब जल गया। अब दवा कैसे होगी, कुछ समझ नहीं आ रहा। वहीं एक बच्ची जान्हवी राख के ढेर को देखते हुए सिर्फ इतना कह पाई कि हमारी किताबें निकाल लो…लेकिन किताबें भी आग में जल चुकी थीं।


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20 परिवार पंचायत भवन में रात बिताने को मजबूर रहे

ग्रामीणों का कहना है कि बरसों की मेहनत के बाद उन्होंने जैसे-तैसे टूटा-फूटा आशियाना बनाया था। मजदूरी कर, पैसे जोड़कर घर खड़ा किया था, लेकिन कुछ ही घंटों में सब खत्म हो गया। अब उनके पास पहनने के कपड़ों के अलावा कुछ नहीं बचा। आग के बाद करीब 20 परिवार पंचायत भवन में रात बिताने को मजबूर रहे।




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