प्रदेश में हर दिन कहीं न कहीं नकली दवाओं की खेप मिल रही है। इस पूरे नेटवर्क में कहीं न कहीं विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। कोडीन मामले में भी कई अफसरों की लापरवाही मिली थी, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम तभी सक्रिय होती है, जब निजी कंपनियों की ओर से उनके कारोबार के प्रभावित होने की शिकायत की जाती है। राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल से नकली दवाएं पूरे प्रदेश में फैल चुकी हैं।
नारकोटिक्स दवाएं भी भरपूर बेची जा रही
कुछ ऐसा ही हुआ था कोडीन कफ सीरप के मामले में भी। दिसंबर 2025 से जनवरी, फरवरी 2026 में चले जांच अभियान में आगरा, लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर सहित सभी शहरों में धड़ल्ले से कोडीन सीरप के पहुंचने की पुष्टि हुई। इतना ही नहीं नारकोटिक्स दवाएं भी भरपूर बेची जा रही है।
यूपी के रास्ते दूसरे राज्यों और नेपाल व बांग्लादेश तक दवाएं जाने की जानकारी एफएसडीए को मिली। इतना ही नहीं एफएसडीए आयुक्त के आदेश को भी सहायक आयुक्त ने धता बता दिया। इसके बाद भी किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।
पूरे अभियान के दौरान करीब 128 एफआईआर दर्ज हुए, 35 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हुई और मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी गई। विभागीय कार्रवाई देखें तो सिर्फ अमेठी के इंस्पेक्टर कमलेश मिश्रा को निलंबित किया गया।
