यूपी में जनगणना का तीसरा चरण जिसमें घर घर जाकर लोगों की गणना होनी है, फरवरी 2027 में प्रस्तावित है। वहीं 2017 और 2022 की समय सारणी के अनुसार फरवरी-मार्च 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। जनगणना और चुनाव साथ साथ कैसे हो सकते है, अमर उजाला के इस सवाल के जवाब में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि जनगणना एक कानूनी प्रक्रिया है, जबकि विधानसभा चुनाव संवैधानिक प्रक्रिया है।
उन्होंने कहा कि इसलिए संवैधानिक प्रक्रिया ज्यादा महत्वपूर्ण है। कहा कि यूपी में 22 मई 2027 तक चुनाव कराना है, उससे पहले चुनाव करा दिया जाएगा। ज्ञानेश कुमार के कहने का आशय यह था कि विधानसभा चुनाव समय पर होंगे, आवश्यकता हुई तो जनगणना के कार्य को आगे-पीछे बढ़ाया जा सकता है। यहां बता दें उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के विशेष साक्षात्कार में उनके हवाले से अमर उजाला पहले ही यह प्रकाशित कर चुका है कि यूपी के विधानसभा चुनाव तय समय पर ही होंगे।
ये भी पढ़ें – कानपुर एक्सप्रेसवे: दो व तीन पहिया वाहनों के लिए लगवाए चेतावनी बोर्ड, विपरीत दिशा से आने पर 5000 का जुर्माना
ये भी पढ़ें – ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर तैयार 4 लाख 37 हजार रुपये की नकली दवाएं पकड़ी, एक गिरफ्तार
ज्ञानेश कुमार ने अमर उजाला के एक सवाल के जवाब में यह भी कहा कि अगर यूपी में एसआईआर के दौरान रिश्तों का मिलान यानी वर्ष 2003 की मतदाता सूची में माता-पिता, दादा-दादी या नाना-नानी का नाम गलत ढंग से हुआ है, तो शिकायत मिलने पर उसे भी ठीक करने के लिए समुचित कदम उठाए जाएंगे। हालांकि उन्होंने सीसीटीवी की नजर में मतदान करने की संभावनाओं से इनकार किया। कहा कि यह वोटर की निजता व गोपनीयता के अधिकारों का हनन होगा।