केस 1: रजिया हाशमी हरदोई में मुन्ने मियां चैाराहा खजांची टोला निवासी हैं। उन्होंने टाटा मोटर्स से नई बस यूपी 30 ईटी 4037 खरीदी। जिसकी बॅाडी बनवाई गई, जो मानकों के विपरीत थी। बस की बॅाडी बड़ी थी। सिटिंग व इमरजेंसी गेट में भी गड़बड़ी थी। लेकिन दलालों से सांठगांठ कर अफसरों से बस का पंजीकरण कर दिया। बस सवारियां ढो रही है, जिससे कभी भी हादसे हो सकते हैं।
केस 2: बसुधा हरदोई में हरदेवगंज की रहने वाली हैं। उन्होंने अशोक लीलैंड की नई बस यूपी 30 ईटी 4066 खरीदी। उन्होंने भी बॅाडी बनवाई और दलालों से बस का पंजीकरण एआरटीओ हरदोई में करवा दिया। सूत्र बताते हैं कि बस की बॅाडी, फ्लोर, सीटों, गेट आदि मानकों पर फिट नहीं थीं। लेकिन दलालों ने पंजीकरण करवा दिया।
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हरदोई में मानकों के विपरीत ऐसे ही बसों के पंजीकरण खुलेआम किए जा रहे हैं। दलालों से मिलीभगत कर अफसर बसों को रजिस्टर कर हैं, जो सड़कों पर फर्राटा भर रही हैं। ऐसी बसें कभी भी सड़क हादसे की वजहें बन सकती हैं।
मोहनलालगंज में दिल्ली से बिहार जा रही बस में आग लग गई थी और पांच यात्रियों की जलकर दर्दनाक मैात हो गई थी। हाल ही में गोसाईंगंज में हुए बस हादसे में भी मुसाफिरों को चोटें आई थीं। ऐसे तमाम बस हादसे हैं। इन बस हादसों की पड़ताल पर फिटनेस सवालों के घेरे में आई थी।
रिपोर्टों में यह बात उजागर हुई कि बसों की फिटनेस व बॅाडी में मानकों की अनदेखी की गई। सिटिंग से छेड़छाड़ हुई और इमरजेंसी गेट तक नहीं थे। परिवहन विभाग के अफसर इन हादसों से भी सबक नहीं ले रहे हैं। हरदोई में खुलेआम बसों का पंजीकरण मानकों की अनदेखी कर हो रहा है। उपरोक्त मामले इसकी बानगीभर हैं। हरदोई लखनऊ संभाग में आता है। ऐसे में लखनऊ में बैठे संभाग व मुख्यालय के अफसर भी अनफिट बसों के पंजीकरण के लिए जिम्मेदार हैं।
