मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कारागार विभाग की समीक्षा करते हुए कहा कि जेलों को सिर्फ बंदी रखने का स्थान नहीं, बल्कि सुधार, पुनर्वास और कौशल विकास का प्रभावी केंद्र बनाएं। जेल सिर्फ पेशेवर अपराधी और माफिया के लिए होनी चाहिए। छोटे अपराधों के लिए ओपन जेल उपयोगी होगी। सीएम ने कारागार विभाग में रिक्त पदों को भरने के भी निर्देश दिए हैं।
सीएम ने निर्देश दिए कि 75 वर्ष से अधिक उम्र के कैदियों, असाध्य रोगों से ग्रस्त कैदियों, बच्चों के साथ जेल में बंद महिला कैदियों और जमानत राशि जमा न कर पाने वाले कैदियों की सूची तैयार की जाए। बैठक में बताया गया कि विभाग में विभिन्न श्रेणियों के 3647 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। वर्ष 2017 से अब तक 4055 नियुक्तियां दी गई हैं। मुख्यमंत्री ने रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए। सीएम को बंदियों की समयपूर्व रिहाई के बारे में बताया गया कि वर्ष 2012 से 2016 के बीच 273 बंदियों को समयपूर्व रिहाई हुई थी, जबकि वर्ष 2017 से 2021 के बीच यह संख्या बढ़कर 2882 और वर्ष 2022 से 2026 के बीच 3846 हो गई।
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ओपन जेल के लिए बनाएं विशेष कार्ययोजना
सीएम ने ओपन जेल के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। जेलों में कैदियों की भीड़ को कम करने के लिए निर्माणाधीन परियोजनाओं को समय पूरा करेंगे। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 में प्रदेश की 70 जेलों में क्षमता 58400 थी जबकि बंदियों की संख्या 96,383 थी और ओवरक्राउडिंग दर 1.77 थी।
अमेठी समेत छह नए कारागार जल्द
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 से अब तक चित्रकूट, अंबेडकरनगर, संतकबीरनगर, इटावा, प्रयागराज, श्रावस्ती और बरेली समेत सात नए कारागार संचालित किए गए हैं जिससे 10495 बंदियों की अतिरिक्त क्षमता विकसित हुई है। अमेठी, महोबा, हाथरस, कुशीनगर, जौनपुर और हापुड़ में छह नए कारागार बन रहे है। सीएम ने कहा कि जेलों में सुरक्षा के लिए तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करें।
