इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने नाबालिग बालिका से दुष्कर्म करने में सत्र अदालत से दुष्कर्मी को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को उचित करार दिया। कोर्ट ने यह महत्वपूर्ण फैसला दुष्कर्मी की ओर से दाखिल अपील को खारिज करके सुनाया। मामला हरदोई के बेनीगंज थाना क्षेत्र का था।

न्यायमूर्ति रजनीश कुमार और न्यायमूर्ति जफीर अहमद की खंडपीठ ने यह फैसला उम्रकैद की सजा पाए राजेंद्र की अपील पर दिया। हरदोई की सत्र अदालत ने उसे वर्ष 2006 में दुष्कर्म के आरोप में आजीवन कारावास के साथ 10 हजार रूपए जुर्माने की सजा सुनाई थी। अपीलकर्ता की ओर से सजा के इस फैसले को चुनौती दी गई थी।

अभियोजन पक्ष के अनुसार अपीलकर्ता राजेंद्र ने 28 मार्च 2005 को पड़ोस में रहने वाली करीब 12 साल की नाबालिग पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया था। हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में अभियोजन पक्ष, अपीलकर्ता के खिलाफ दुष्कर्म के अपराध को तर्कसंगत संदेह से परे साबित करने में सफल रहा। 

ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्य का ठीक से मूल्यांकन करके अपीलकर्ता को दोषी ठहराया। ऐसे में ट्रायल कोर्ट के फैसले में ऐसी कोई अवैधानिकता या त्रुटि नहीं है जिससे यह दखल देने योग्य हो। लिहाजा, अपील खारिज करने योग्य है। इस टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने स्पूओ खारिज कर दी।



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