इलाहाबाद हाईकोर्ट ने करीब 49 साल पुराने रिश्वत के मामले में लेखपाल की एक साल के कठोर कारावास की सजा बरकरार रखी। कोर्ट ने 41 साल पुरानी आपराधिक अपील खारिज कर दोषी को चार सप्ताह में संबंधित ट्रायल कोर्ट में सरेंडर कर बची सजा काटने का आदेश दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति संजीव कुमार की एकल पीठ ने महेश चंद की याचिका पर दिया। अभियोजन के अनुसार कानपुर की एक तहसील में तैनात लेखपाल महेश चंद ने भूमि विवाद में एक पक्षकार से दूसरे की अपील खारिज कराने के नाम पर 400 रुपये रिश्वत मांगी थी। शिकायत के बाद विजिलेंस ने फिनॉल्फ्थेलीन पाउडर लगे 100-100 रुपये के तीन नोट शिकायतकर्ता को दिए। 

होटल में जैसे ही महेश चंद ने 300 रुपये लेकर उन्हें अपनी जेब में रखा, विजिलेंस टीम ने रंगे हाथों पकड़ लिया। ट्रायल कोर्ट ने 1985 में महेश चंद को दोषी ठहराते हुए एक साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद दोषी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की, जो चार दशक से अधिक समय तक लंबित रही। 



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