– बारिश के पानी का गांवों में ही किया जा रहा संचय
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। टहरौली तहसील के 40 गांवों का हवेली संरचना से जल संकट दूर हो गया है। यहां बारिश के पानी का गांवों में ही संचय किया जा रहा है, जिससे कुएं और तालाब पानी से लबालब भरे हुए हैं। साथ ही भूगर्भ जल स्तर में भी इजाफा हुआ है। इसका लाभ 28 हजार हेक्टेअर कृषि भूमि को मिलने जा रहा है।
बारिश के पानी को बहने से रोकने के लिए टहरौली तहसील के 40 गांवों के लिए नवंबर 2022 में हवेली संरचना स्वीकृत हुई थी। 33.56 करोड़ की इस परियोजना के तहत यहां 12 बड़े तालाबों का निर्माण किया गया, जबकि पांच पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार किया गया। इसके अलावा 50 किमी लंबे नाले गहरे और चौड़े किए गए। नालों पर 100 बांध भी बनाए गए। साथ ही 2850 हेक्टेअर क्षेत्रफल के खेतों पर मेड़बंदी की गई और अतिरिक्त जल निकासी के लिए सरप्लस संरचनाओं का निर्माण किया गया। इन सभी प्रयासों से अब तक 15.75 मिलिन क्यूबिक मीटर वर्षा जल संरक्षित किया जा चुका है। अब इसका असर क्षेत्र के भूमिगत जलस्तर पर नजर आने लगा है। क्षेत्र के कुओं का जल स्तर तीन-चार मीटर तक बढ़ गया है। कई कुएं तो पानी से इतने लबालब भर गए हैं कि उनसे हाथ से बाल्टी डालकर पानी खींचा जा सकता है।
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विदेशों में जमी हवेली संरचना की धाक
हवेली संरचना के जरिये किए गए जल संरक्षण के उपायों की गूंज विदेशों में भी सुनाई दे रही है। यही वजह है कि नौ देशाें के प्रतिनिधि यहां आकर इस संरचना को देख चुके हैं। अमेरिका, जर्मनी, जापान, इंग्लैंड, फिलीपींस, कोरिया, क्यूबा व दक्षिण अफ्रीका के प्रतिनिधि यहां आ चुके हैं। जबकि, पिछले सप्ताह यूगांडा का एक दल यहां आया था।
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बुंदेलखंड में लागू करने की है तैयारी
हवेली संरचना के जरिये जल संचय की शुरुआत बुंदेलखंड के सात जनपदों के 21 गांवों से हुई थी। प्रत्येक जिले के तीन-तीन गांवों को इसमें शामिल किया गया था। इनमें झांसी के ग्राम परासई, बछौनी व सुट्टा शामिल थे। अब इस परियोजना को पूरे बुंदेलखंड में लागू करने की तैयारी है।
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जल संरक्षण के लिए किए गए उपायों की सकारात्मक तस्वीर नजर आने लगी है। जिन कुओं का पानी कभी रसातल में पहुंच गया था, उनमें अब लबालब पानी भरा हुआ है। सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध है। टहरौली तहसील अब जल संकटग्रस्त इलाका नहीं रहा है। – डॉ. रमेश सिंह, हेड-इक्रीसेट डेवलपमेंट सेंटर
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टहरौली तहसील में किए गए जल संरक्षण के उपाय देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में नजीर बन गए हैं। हवेली संरचना को अब पूरे बुंदेलखंड में लागू करने की तैयारी है। इस परियोजना के जरिये बेहद कम लागत में वर्षा जल का संचय किया जा रहा है। पहले तालाबों को बुंदेली में हवेली कहते थे, यह वजह है कि इस परियोजना को हवेली नाम दिया गया है। – हरगोविंद कुशवाहा, उपाध्यक्ष-अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान
