मथुरा। World Vitiligo Day के अवसर पर मथुरा में आयोजित विटिलिगो सपोर्ट इंडिया का विशेष कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह मानव संवेदनाओं, आत्मविश्वास, सामाजिक स्वीकार्यता और सकारात्मक बदलाव का ऐसा मंच बना, जिसने उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति को भावुक कर दिया। कार्यक्रम में आयोजित “विटिलिगो वॉरियर्स सम्मान समारोह” और “कवि सम्मेलन” के साथ-साथ “आपबीती” सत्र सबसे अधिक चर्चित रहा, जहां मंच पर साझा किए गए जीवन संघर्षों ने सभागार का माहौल भावनात्मक बना दिया। कई क्षण ऐसे आए जब उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं। इन अनुभवों ने यह सोचने पर भी मजबूर किया कि आधुनिक समाज में आज भी विटिलिगो जैसी त्वचा संबंधी स्थिति को लेकर अनेक लोग सामाजिक उपेक्षा और मानसिक पीड़ा का सामना कर रहे हैं।

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल सम्मान देना नहीं था, बल्कि यह संदेश देना भी था कि विटिलिगो किसी व्यक्ति की क्षमता, प्रतिभा या व्यक्तित्व की पहचान नहीं है। आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और समाज का सहयोग किसी भी चुनौती को अवसर में बदल सकता है।

विटिलिगो सपोर्ट इंडिया ने हजारों लोगों के जीवन में जगाई उम्मीद

कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि विटिलिगो सपोर्ट इंडिया ने अपनी अपेक्षाकृत छोटी यात्रा में ही देश-विदेश के हजारों लोगों तक पहुंच बनाकर उनके जीवन में नई आशा और आत्मविश्वास का संचार किया है। संस्था लगातार ऐसे लोगों को एक मंच उपलब्ध करा रही है, जो वर्षों से सामाजिक भेदभाव, मानसिक तनाव और आत्मग्लानि जैसी परिस्थितियों से जूझते रहे हैं।

इस वर्ष आयोजित समारोह का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण “आपबीती” सत्र रहा, जिसमें विटिलिगो से जुड़े लोगों ने बिना किसी झिझक के अपने जीवन के अनुभव साझा किए। यह केवल व्यक्तिगत संघर्षों का मंच नहीं था, बल्कि समाज के लिए आत्ममंथन का अवसर भी बन गया।

संस्थापक रविन्द्र जायसवाल ने साझा की अपनी संघर्षपूर्ण यात्रा

विटिलिगो सपोर्ट इंडिया के संस्थापक रविन्द्र जायसवाल ने अपने संबोधन में बताया कि किन व्यक्तिगत अनुभवों और सामाजिक परिस्थितियों ने उन्हें इस संस्था की स्थापना करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पिछले लगभग पंद्रह महीनों के दौरान देश और विदेश से सैकड़ों ऐसे लोगों की कहानियां उनके सामने आईं, जो विटिलिगो के कारण केवल शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक और सामाजिक संघर्ष भी झेल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि समाज अक्सर इस स्थिति को केवल त्वचा से जुड़ी समस्या समझता है, जबकि वास्तविक पीड़ा सामाजिक व्यवहार, उपेक्षा और गलत धारणाओं से उत्पन्न होती है। संस्था का उद्देश्य लोगों को केवल जानकारी देना नहीं बल्कि उनके भीतर आत्मविश्वास जगाना भी है।

केन्या की मां और भारतीय सैनिक की कहानी ने सभी को किया भावुक

रविन्द्र जायसवाल ने कार्यक्रम में दो ऐसी प्रेरणादायक कहानियां साझा कीं, जिन्होंने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया।

उन्होंने केन्या की एक मां का उल्लेख करते हुए बताया कि वह अपने विटिलिगो प्रभावित बच्चे की परवरिश करते हुए स्वयं भी पारिवारिक उपेक्षा का सामना कर रही है। इसके बावजूद उसने हार नहीं मानी और अपने बच्चे के भविष्य के लिए लगातार संघर्ष कर रही है।

इसके बाद उन्होंने एक भारतीय सैनिक की कहानी साझा की, जो देश की सीमाओं पर निडर होकर राष्ट्र की रक्षा करता है, लेकिन घर लौटने पर विटिलिगो के कारण सामाजिक भेदभाव और उपेक्षा झेलता है। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने यह संदेश दिया कि वास्तविक संघर्ष केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि समाज की संकीर्ण सोच के विरुद्ध भी जारी है।

वंदना चौधरी और पारुल गुप्ता ने सुनाई प्रेरणादायक जीवन यात्रा

दिल्ली से आईं सुप्रसिद्ध कवयित्री वंदना चौधरी ने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि कई बार अपनों से मिला दर्द सबसे अधिक गहरा होता है। उन्होंने अपने पति के सहयोग का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में परिवार का विश्वास किसी भी व्यक्ति को नई शक्ति देता है। इसी सहयोग ने उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का साहस दिया।

कार्यक्रम का संचालन कर रहीं पारुल गुप्ता ने भी अपनी जीवन यात्रा साझा की। उन्होंने बताया कि उन्होंने भी सामाजिक चुनौतियों और मानसिक संघर्षों का सामना किया, लेकिन आज वे इन्हीं अनुभवों को अपनी ताकत बनाकर विटिलिगो से जुड़े लोगों में जागरूकता फैलाने का कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि समाज की सोच बदलना समय की आवश्यकता है और इसके लिए संवाद सबसे प्रभावी माध्यम है।

मथुरा के सुनील चौधरी ने साझा किए अपने अनुभव

मथुरा निवासी सुनील चौधरी ने बताया कि वे आज भी उपचार की प्रक्रिया में हैं और आयुर्वेदिक चिकित्सा के साथ सकारात्मक सोच बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी बीमारी या शारीरिक स्थिति से लड़ने के लिए मानसिक मजबूती सबसे बड़ा सहारा होती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि विटिलिगो से प्रभावित व्यक्तियों को सहानुभूति नहीं बल्कि सम्मान और समान अवसर दिए जाएं।

विश्व विटिलिगो दिवस का महत्व और समाज के लिए संदेश

कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान श्रीगणेश एवं मां सरस्वती की वंदना से हुआ। वंदना चौधरी की भक्तिमय प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।अपने संबोधन में पारुल गुप्ता ने विश्व विटिलिगो दिवस के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विटिलिगो केवल त्वचा के रंगद्रव्य (पिगमेंट) से जुड़ी एक चिकित्सकीय स्थिति है, इसे किसी भी प्रकार से व्यक्ति की योग्यता, क्षमता, प्रतिभा या व्यक्तित्व से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। दुर्भाग्यवश समाज में आज भी इस विषय को लेकर अनेक भ्रांतियां और पूर्वाग्रह मौजूद हैं, जिनके कारण प्रभावित लोगों को मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि लोग विटिलिगो के बारे में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं और इसे किसी सामाजिक कलंक के रूप में देखने के बजाय सामान्य स्वास्थ्य स्थिति के रूप में स्वीकार करें। जब समाज की सोच बदलेगी, तभी विटिलिगो से जुड़े लोग भी बिना किसी संकोच के आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकेंगे।

देश-विदेश की प्रेरणादायक हस्तियों का किया उल्लेख

पारुल गुप्ता ने अपने संबोधन के दौरान ऐसे कई प्रसिद्ध व्यक्तित्वों का उल्लेख किया जिन्होंने विटिलिगो के साथ जीवन जीते हुए भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने कहा कि प्रतिभा का संबंध व्यक्ति के रंग या त्वचा से नहीं बल्कि उसकी मेहनत, आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति से होता है।

उन्होंने माइकल जैक्सन, विनी हार्लो, संतोष गंगवार तथा गौतम सिंघानिया सहित अनेक प्रेरणादायक हस्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन व्यक्तित्वों ने यह सिद्ध किया है कि जीवन में सफलता का रास्ता आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास से होकर गुजरता है।

झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार का संदेश भी पढ़कर सुनाया गया

कार्यक्रम के दौरान पारुल गुप्ता ने झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार द्वारा विटिलिगो सपोर्ट इंडिया को भेजा गया शुभकामना संदेश भी उपस्थित लोगों के समक्ष पढ़कर सुनाया। अपने संदेश में उन्होंने संस्था द्वारा विटिलिगो के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने, सकारात्मक सोच विकसित करने तथा प्रभावित लोगों का मनोबल बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए भी यह संदेश दिया कि समाज में संवेदनशीलता, समानता और सम्मान की भावना को बढ़ावा देना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।

संस्था की स्थापना से लेकर एक वर्ष की उपलब्धियों की दी जानकारी

संस्था के सचिव डॉ. कपिल बंसल ने विटिलिगो सपोर्ट इंडिया की स्थापना, उसके उद्देश्यों तथा पिछले एक वर्ष के दौरान किए गए विभिन्न सामाजिक कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने संस्था के पदाधिकारियों, स्वयंसेवकों और सदस्यों का परिचय कराते हुए बताया कि संस्था का मूल उद्देश्य केवल जागरूकता अभियान चलाना नहीं बल्कि विटिलिगो से जुड़े लोगों को एक ऐसा परिवार उपलब्ध कराना है, जहां उन्हें मानसिक सहयोग, सकारात्मक वातावरण और आत्मविश्वास मिल सके।

उन्होंने कहा कि संस्था लगातार ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से देशभर के लोगों से जुड़ रही है और भविष्य में इस अभियान को और व्यापक बनाने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

मुख्य अतिथि डॉ. भुवन बंसल ने काउंसलिंग को बताया सबसे महत्वपूर्ण उपचार

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं एम.डी. (होम्योपैथी) गोल्ड मेडलिस्ट डॉ. भुवन बंसल का स्वागत संस्था के उपाध्यक्ष मोहम्मद ज़ाहिद ने किया।

अपने संबोधन में डॉ. भुवन बंसल ने कहा कि वर्तमान समय में विटिलिगो का पूर्ण और सार्वभौमिक उपचार उपलब्ध नहीं है, लेकिन समय पर उचित चिकित्सा, नियमित निगरानी, सकारात्मक सोच तथा प्रभावी काउंसलिंग के माध्यम से रोगी के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि किसी भी उपचार की शुरुआत रोगी के मनोबल को मजबूत करने से होनी चाहिए। यदि मरीज मानसिक रूप से मजबूत रहता है तो उपचार के प्रति उसका विश्वास भी बढ़ता है और वह सामाजिक जीवन में अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकता है।

उन्होंने चिकित्सकों से भी आग्रह किया कि वे केवल दवाइयों तक सीमित न रहें बल्कि मरीजों और उनके परिवारों को मानसिक सहयोग और सही जानकारी भी उपलब्ध कराएं।

विटिलिगो वॉरियर्स का सम्मान बना समारोह का विशेष आकर्षण

कविता पाठ प्रारंभ होने से पहले विटिलिगो वॉरियर्स सम्मान समारोह आयोजित किया गया। वरिष्ठ पत्रकार श्रीप्रकाश शुक्ला ने सभी सम्मानित प्रतिभागियों को सम्मान स्वरूप पटका पहनाकर उनका अभिनंदन किया तथा उनके संघर्ष, साहस और सकारात्मक सोच की सराहना की।

उन्होंने कहा कि ऐसे लोग वास्तव में समाज के प्रेरणास्रोत हैं, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हार नहीं मानी और आज दूसरों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।

सम्मानित होने वालों में रविन्द्र जायसवाल, प्रीति गुप्ता, हरदोई से पारुल गुप्ता, दिल्ली से आईं कवयित्री वंदना चौधरी, शंकर लाल पंजवानी, मथुरा से वरुण भारद्वाज एवं सुनील चौधरी तथा आगरा से डॉ. सलीम अहमद प्रमुख रूप से शामिल रहे।

इस सम्मान समारोह ने सभी प्रतिभागियों के चेहरे पर आत्मविश्वास की नई मुस्कान ला दी और उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया।

कवि सम्मेलन ने साहित्य के माध्यम से दिया सामाजिक संदेश

कार्यक्रम के दूसरे चरण में आयोजित कवि सम्मेलन ने पूरे आयोजन को साहित्यिक गरिमा प्रदान की। आगरा से पधारे प्रसिद्ध कवि डॉ. सलीम अहमद एटवी ने प्रभावशाली संचालन करते हुए विभिन्न कवियों को मंच पर आमंत्रित किया।

दिल्ली से आईं कवयित्री वंदना चौधरी, मथुरा के डॉ. उदयवीर सिंह तथा आगरा से आए कवि संजय कुमार एवं राजेश शर्मा ने अपनी ग़ज़लों, कविताओं और शायरियों के माध्यम से सामाजिक संवेदनाओं, आत्मसम्मान, संघर्ष और सकारात्मक सोच का संदेश दिया।

कवियों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित श्रोताओं को भावुक भी किया और प्रेरित भी। साहित्य और संवेदनाओं का यह अनूठा संगम कार्यक्रम की सबसे यादगार झलकियों में शामिल रहा।

कवियों और साहित्यकारों को किया गया सम्मानित

कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभी आमंत्रित कवियों एवं साहित्यकारों को सम्मान-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कवयित्री वंदना चौधरी को सम्मान-पत्र प्रीति गुप्ता ने प्रदान किया। डॉ. सलीम अहमद एटवी को रविन्द्र जायसवाल, डॉ. उदयवीर सिंह को मोहम्मद ज़ाहिद, कवि संजय कुमार को डॉ. कपिल बंसल तथा कवि राकेश शर्मा को वरिष्ठ पत्रकार श्रीप्रकाश शुक्ला ने प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया।

छह लोगों से शुरू हुआ सफर, अब सैकड़ों लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य

अंत में संस्था के उपाध्यक्ष मोहम्मद ज़ाहिद ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, सहयोगियों और स्वयंसेवकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

उन्होंने बताया कि विटिलिगो सपोर्ट इंडिया ने अपने पहले कार्यक्रम की शुरुआत मात्र छह लोगों के साथ की थी। आज दूसरे विश्व विटिलिगो दिवस समारोह में 60 से अधिक प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि समाज में जागरूकता लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2027 तक संस्था का लक्ष्य 500 से 600 विटिलिगो साथियों को एक मंच पर लाकर देश के सबसे बड़े जागरूकता अभियानों में से एक का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि संस्था आने वाले वर्षों में चिकित्सा विशेषज्ञों, मनोवैज्ञानिकों, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवकों के सहयोग से इस अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रभावशाली बनाने की दिशा में कार्य करेगी।

सामाजिक सोच बदलने की दिशा में एक सार्थक पहल

विश्व विटिलिगो दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल सम्मान समारोह या सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया कि किसी भी व्यक्ति का मूल्य उसकी त्वचा के रंग से नहीं बल्कि उसके व्यक्तित्व, कर्म, प्रतिभा और मानवीय मूल्यों से निर्धारित होता है।

विटिलिगो सपोर्ट इंडिया द्वारा प्रस्तुत संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास की इन कहानियों ने यह साबित किया कि यदि समाज संवेदनशील बने, परिवार सहयोग करे और सही मार्गदर्शन उपलब्ध हो तो कोई भी व्यक्ति अपनी परिस्थितियों को अपनी पहचान बनने से रोक सकता है। यह आयोजन सामाजिक जागरूकता, मानसिक स्वास्थ्य, आत्मसम्मान और समान अवसर की दिशा में एक सकारात्मक और प्रेरणादायक पहल के रूप में लंबे समय तक याद किया जाएगा।

विश्व विटिलिगो दिवस पर मथुरा में आयोजित यह कार्यक्रम मानवता, संवेदनशीलता और सामाजिक स्वीकार्यता का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया। संघर्षों से निकलकर आत्मविश्वास के साथ समाज के सामने खड़े हुए विटिलिगो वॉरियर्स ने यह संदेश दिया कि जीवन की सबसे बड़ी ताकत बाहरी रूप नहीं, बल्कि भीतर का साहस और सकारात्मक सोच है। संस्था द्वारा चलाया जा रहा यह जागरूकता अभियान न केवल विटिलिगो से जुड़े लोगों का मनोबल बढ़ा रहा है, बल्कि समाज को भी भेदभाव छोड़कर सम्मान, समानता और संवेदनशीलता की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहा है।

 



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