कुठौंदा (जालौन)। अटूट आस्था, कठिन तपस्या और अद्भुत संकल्प का परिचय देते हुए ग्राम कुठौंदा से चारधाम की पैदल यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं ने यात्रा के 88वें दिन भगवान श्री बद्रीनाथ के पावन धाम पहुंचकर दर्शन, स्नान एवं विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। “जय श्री बद्री विशाल” के जयघोष से पूरा धाम भक्तिमय हो उठा और श्रद्धालु भावविभोर होकर ईश्वर की आराधना में लीन हो गए।
गौरतलब है कि 24 अप्रैल 2026 को ग्राम कुठौंदा स्थित प्राचीन एवं सिद्धपीठ श्री महावीर जी मंदिर से महंत श्री रामेश्वर दास जी महाराज के नेतृत्व में उत्तराखंड चारधाम पदयात्रा का शुभारंभ हुआ था। इस यात्रा का उद्देश्य केवल चारधाम दर्शन ही नहीं, बल्कि विश्व शांति, मानव कल्याण, सनातन संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक एकता का संदेश जन-जन तक पहुंचाना भी है।
लगातार 88 दिनों तक पदयात्रियों ने भीषण गर्मी, उत्तराखंड की दुर्गम पर्वतीय चढ़ाइयों, फिसलन भरे रास्तों, कड़ाके की ठंड, मूसलाधार बारिश और जंगलों में रात्रि विश्राम जैसी कठिन परिस्थितियों का साहसपूर्वक सामना किया। कई स्थानों पर जंगली जानवरों का भय भी रहा, लेकिन श्रद्धा और विश्वास के बल पर यात्रियों का उत्साह कभी कम नहीं हुआ। हर चुनौती को स्वीकार करते हुए उन्होंने अपनी यात्रा को तप, त्याग और भक्ति का अनुपम उदाहरण बना दिया।
बद्रीनाथ धाम पहुंचने पर साधु-संत एवं पदयात्री भक्ति, साधना और चिंतन में लीन हो गए। भगवान श्री बद्रीनारायण के समक्ष देश, समाज और विश्व के कल्याण की कामना करते हुए विशेष पूजा-अर्चना की गई। पूरे धाम में “जय श्री बद्री विशाल” के उद्घोष से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
महंत श्री रामेश्वर दास जी महाराज ने बताया कि इस पदयात्रा का मूल उद्देश्य विश्व में शांति, सद्भाव, भाईचारा और सनातन धर्म की एकता का संदेश फैलाना है। उन्होंने सभी के स्वस्थ, सुखी एवं समृद्ध जीवन की कामना करते हुए कहा कि आस्था, सेवा और समर्पण ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
इस ऐतिहासिक पदयात्रा में महंत सत्यनारायण दास (सिकरी), महंत विश्वंभर दास (खनेता) तथा संत राम पांडेय (मुखिया, रेंडर) सहित अन्य श्रद्धालु भी शामिल रहे।
पदयात्रा का शुभारंभ 24 अप्रैल 2026 को महामंडलेश्वर यज्ञपीठाधीश्वर श्री दूधाधारी महाराज जी, महामंडलेश्वर मनमोहन दास जी महाराज (खटखटा वृंदावन धाम), महंत श्री सिद्धराम महाराज (पीठाधीश्वर ठडेश्वरी, उरई), मंडलेश्वर रामकरन दास (कालपी), मंडलेश्वर गोपाल दास (बंगरा) एवं मंडलेश्वर वीरू महाराज (गोहन) सहित अनेक संत-महात्माओं ने हरी झंडी दिखाकर किया था। इस अवसर पर जिले के वरिष्ठ पत्रकार, गणमान्य नागरिक, साधु-संत एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे थे।
यात्रा के दौरान विभिन्न राज्यों और नगरों में श्रद्धालुओं ने पदयात्रियों का पुष्पवर्षा, माल्यार्पण एवं स्वागत-सत्कार कर उनका उत्साहवर्धन किया। श्रद्धालुओं के स्नेह और सम्मान ने यात्रियों की दिनभर की थकान को पलभर में दूर कर दिया।
क्षेत्रवासियों ने महंत श्री रामेश्वर दास जी महाराज की इस ऐतिहासिक पदयात्रा की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, आस्था, अनुशासन, त्याग और राष्ट्रीय एकता का जीवंत संदेश है। ग्रामीणों ने विश्वास व्यक्त किया कि भगवान बद्रीविशाल की कृपा से संपन्न हुई यह ऐतिहासिक चारधाम पदयात्रा आने वाली कई पीढ़ियों तक श्रद्धा और प्रेरणा का केंद्र बनी रहेगी।

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