श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक बुधवार को मणिरामदास छावनी में शुरू हो गई। बैठक दो चरणों में होगी। पहले चरण की बैठक दोपहर दो बजे से प्रारंभ हुई, जिसमें ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारी और ट्रस्टी शामिल हुए हैं। बैठक में अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन, कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरि, ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास, शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती समेत अन्य ट्रस्टी पहुंचे हैं। बैठक को लेकर अयोध्या में पहले से ही हलचल बनी हुई थी।
पहले चरण की बैठक में राम मंदिर के पहले मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ ) के चयन को लेकर मंथन किया जाएगा। सीईओ के चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय सर्च कमेटी अपनी रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप चुकी है। रिपोर्ट में तीन नामों का पैनल दिए जाने की जानकारी है। अब ट्रस्ट की बैठक में इन नामों पर विचार-विमर्श के बाद सीईओ के नाम पर अंतिम फैसला होने की संभावना है। बैठक के दूसरे चरण में ट्रस्ट से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की जाएगी।
इस पूरी कवायद के बीच पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय का नाम सीईओ के लिए सबसे मजबूत दावेदार के तौर पर उभरकर सामने आया है। राजेश पांडेय की दावेदारी को खास बनाने वाली बात सिर्फ उनका पुलिस और प्रशासनिक अनुभव नहीं है। वह लखनऊ के अलीगंज स्थित ऐतिहासिक हनुमान मंदिर के ट्रस्ट के सचिव भी हैं। ऐसे में मंदिर प्रशासन और धार्मिक संस्थान के प्रबंधन का उनका प्रत्यक्ष अनुभव राम मंदिर सीईओ की जिम्मेदारी के लिए उनकी प्रोफाइल को अलग वजन देता है।
राजेश पांडेय पर क्यों टिकी हैं निगाहें?
अंतिम फैसला भले ही ट्रस्ट को करना है, लेकिन सीईओ पद की चर्चाओं में राजेश पांडेय लगातार सबसे आगे बताए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश कैडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी रहे पांडेय को पुलिस सेवा के दौरान चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से काम करने वाले अधिकारी के तौर पर पहचान मिली। राम मंदिर के सीईओ की जिम्मेदारी केवल प्रशासनिक कामकाज तक सीमित नहीं होगी। अयोध्या में प्रतिदिन बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या, सुरक्षा व्यवस्था, विभिन्न सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय, वीआईपी और आम श्रद्धालुओं की व्यवस्थाएं तथा मंदिर से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स के प्रबंधन जैसी कई जिम्मेदारियां सीईओ के सामने होंगी। यही वजह है कि सुरक्षा और प्रशासनिक तंत्र की जटिलताओं को करीब से समझने वाले राजेश पांडेय की दावेदारी को खास वजन मिल रहा है।
परेश सक्सेना और दिनेश चंद्र भी मजबूत नाम
राजेश पांडेय के अलावा बिहार कैडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी और पूर्व डीजीपी परेश सक्सेना का नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल है। लंबे पुलिस और प्रशासनिक अनुभव के चलते उन्हें भी मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है। वहीं उत्तर प्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी दिनेश चंद्र भी इस दौड़ में हैं। वह जौनपुर के पूर्व जिलाधिकारी रह चुके हैं और जिला प्रशासन में बड़े स्तर की व्यवस्थाओं को संभालने का अनुभव रखते हैं। इसके अलावा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबिता सिंह चौहान का नाम भी संभावित दावेदारों की चर्चा में है। हालांकि सर्च कमेटी के अंतिम तीन नामों को लेकर ट्रस्ट की ओर से अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
