खैर में छह वर्षीय उर्मी की मौत के मामले में अब जाम बनाम बीमारी का सवाल खड़ा हो गया है। पुलिस का कहना है कि बच्ची की मौत जाम में फंसने से नहीं, बीमारी के कारण हुई है। पुलिस ने यहां तक कहा है कि अपुष्ट सूचना पर विश्वास न करें। वहीं, बच्ची के पिता कन्हैयालाल ने आरोप लगाया है कि पुलिस और क्षेत्रीय सभासद के दबाव में उन्हें बयान बदलना पड़ा।  दोनों दावों के बीच उलझे इस मामले में एसएसपी नीरज कुमार जादौन ने एसपी ग्रामीण से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और परिजनों पर दबाव बनाए जाने के आरोपों की भी जांच कराने की बात कही है।

दरअसल यह मामला बीते 2 सितंबर का है। विशनपुरी निवासी कन्हैयालाल अपनी बीमार बेटी उर्मी को इलाज के लिए ले जा रहे थे। घटना के बाद परिवार की ओर से जाम में फंसने और सीएचसी पहुंचने में देरी की बात कही गई थी। यह खबर सामने आने पर मुख्यमंत्री मीडिया सेल ने संज्ञान लिया। इसके बाद जिलाधिकारी अविनाश कुमार के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक यातायात एवं लाइन प्रवीण कुमार यादव से प्रकरण की आख्या मांगी गई। इस बीच पीड़ित परिवार का नया वीडियो सामने आया जिसमें उनका कहना था कि बारिश के कारण बाइक धीमी थी और करीब 10 मिनट में वे सीएचसी पहुंच गए थे। उन्होंने यह भी कहा था कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही बच्ची की मौत हो चुकी थी। 

इसके बाद प्रशासन ने खैर के क्षेत्राधिकारी और थाना प्रभारी की जांच और परिजनों के नए वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि बच्ची की मृत्यु बीमारी के कारण हुई है। सोशल मीडिया पर घटना को जाम से जोड़कर प्रसारित की जा रही सूचना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। इस पूरे मामले में सत्यता का पता लगाने के लिए शुक्रवार को संवाद न्यूज एजेंसी के संवाददाता ने पीड़ित परिवार से संपर्क किया तो कन्हैयालाल ने सभासद रामबाबू पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर परिवार को धोखा दिया है। 

पिता कन्हैयालाल और मां गुड़िया के मुताबिक सभासद और पुलिस ने नए बयान में जाम की बात नहीं कहने का दबाव डाला। जब वे बेटी का अंतिम संस्कार करके वापस आए तो एक पुलिसकर्मी ने उन्हें पकड़ा और सभासद ने उनके अंगूठे पर पेन से स्याही लगाकर कागज पर अंगूठा लगवा लिया। उस पर लिखावट भी सभासद की है।



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