छानी खुर्द गांव निवासी रमेश श्रीवास ने शायद कभी नहीं सोचा होगा कि जिस संघर्ष भरी जिंदगी को वह वर्षों से ढो रहा है, वह एक दिन में इतनी बड़ी त्रासदी में बदल जाएगी। डेढ़-दो वर्ष पहले बीमारी के कारण अपना दाहिना हाथ गंवाने वाले रमेश ने हार नहीं मानी। एक हाथ से प्रेस का ठेला चलाकर परिवार का पेट पालता रहा, लेकिन बृहस्पतिवार को हुए हादसे ने उसकी जिंदगी की सारी उम्मीदें छीन लीं। तालाब में डूबने से उसके दोनों बेटे शिवेंद्र (10), रुद्रांश (8) और पांच वर्षीय बेटी मांडवी की मौत हो गई।


निवर्तमान प्रधान प्रतिनिधि अरुण कुमार वर्मा ने बताया कि रमेश के तीन ही बच्चे थे। हादसे में तीनों की मौत हो जाने से घर के तीनों चिराग बुझ गए। बच्चों के शव घर पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। घर के बाहर महिलाओं और रिश्तेदारों की भीड़ जुटी रही। सांत्वना देने पहुंचे लोगों की आंखें भी नम हो गईं।

ग्रामीणों के अनुसार रमेश भूमिहीन है। उसके पास न खेती है और न ही कोई अन्य स्थायी आय का साधन। गांव और आसपास के क्षेत्रों में ठेला लगाकर कपड़ों में प्रेस करने का काम ही उसके परिवार की आजीविका का सहारा था। करीब डेढ़-दो वर्ष पहले हाथ में फैले संक्रमण के कारण उसका दाहिना हाथ काटना पड़ा था। इसके बाद भी उसने हिम्मत नहीं हारी और एक हाथ से ही परिवार की जिम्मेदारी उठाता रहा। परिवार आज भी कच्चे मकान में रहता है।



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