दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के लिए जा रहे श्रद्धालुओं से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली की हाइड्रोलिक अचानक उठने से बड़ा हादसा हो गया। चलती ट्रॉली ऊपर उठने से उसमें सवार महिलाएं और बच्चियां सड़क पर गिर गईं। हादसे में चार साल की मासूम आरोही की मौत हो गई, जबकि 13 लोग घायल हो गए। इनमें एक महिला और किशोरी को गंभीर हालत में जिला अस्पताल रेफर किया गया है।
मौरावां थाना के श्यानपुर गांव में ग्रामीणों ने पहली बार सार्वजनिक रूप से चंदा जुटाकर 11 अक्तूबर को दुर्गा प्रतिमा स्थापित की थी। दशहरा पर प्रतिमा विसर्जन के लिए आठ ट्रैक्टर और दो डीजे के साथ श्रद्धालुओं का जत्था भवरेश्वर स्थित सई नदी जा रहा था। मोहनलालगंज-मौरावां मार्ग पर असोहा थानाक्षेत्र के सरवन गांव के मोड़ के पास अचानक एक ट्रैक्टर की हाइड्रोलिक ट्रॉली ऊपर उठ गई। इससे ट्रॉली में सवार श्यानपुर और पड़ोसी गांव रामपुर की महिलाएं व बच्चियां सड़क पर गिर गईं। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई।
राहगीरों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायलों को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टर ने मासूम आरोही को मृत घोषित कर दिया। घायल मनीषा (16) और शोभा देवी (35) की हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल रेफर किया गया।
असोहा थानाध्यक्ष फूल सिंह ने बताया कि बच्ची का शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। घायलों का सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
चार दिन पहले बुआ के घर आई थी आरोही, विसर्जन यात्रा में चली गई जान
हादसे में जान गंवाने वाली आरोही (4) बीघापुर कोतवाली क्षेत्र के मल्लपुर गांव निवासी जयकुमार की बेटी थी। वह 16 अक्तूबर को अपनी बुआ बिंदेश्वरी के घर श्यानपुर आई थी। मंगलवार को बुआ के साथ दुर्गा प्रतिमा विसर्जन यात्रा में शामिल हुई थी। इसी दौरान हादसे में उसकी मौत हो गई। बेटी की मौत की खबर मिलते ही मां संगीता, बहन आराध्या और अर्पिता का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। आरोही चार भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर थी।
इन घायलों का अस्पतालों में चल रहा इलाज
हादसे में घायल बिंदेश्वरी (40), आंचल (14), सुमित्रा (20), सुनीता (20), सोमा (35), ममता (23), रामरानी (60), धर्मावती (40), शांति देवी (55), मीरा (60) और सुमाना (45) का सौ बेड अस्पताल और निजी अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
पहली बार गांव में सजी थी दुर्गा प्रतिमा, हादसे से मातम
श्यानपुर गांव में पहली बार ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से चंदा जुटाकर दुर्गा पूजा का आयोजन किया था। प्रतिमा विसर्जन के लिए निकली यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए थे। उत्साह के बीच हुए हादसे ने खुशियों को मातम में बदल दिया।
