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कानपुर के इंदिरानगर के रतन आर्बिट में दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या का खुलासा कई सवाल खड़े करता है। पॉश इलाके में शनिवार देर रात हुए हत्याकांड की पुलिस ने 24 घंटे में गुत्थी सुलझाने का दावा तो किया। लेकिन, उसकी थ्योरी ही उलझी हुई है। सोमवार को पुलिस ने मीडिया के सामने लाए बिना हत्यारोपी बहू समेत तीनों आरोपी को जेल भेज दिया।
पुलिस का दावा है कि दवा कारोबारी विनीत की हत्यारोपी बहू को घर खर्च के लिए 10 हजार और बेटे सुब्रत को 35 हजार रुपये वेतन देते थे। सवाल यह है कि इस मामूली रकम में कोई छह लाख की सुपारी कैसे दे सकता है। वहीं, पुलिस साजिश में बेटे सुब्रत का हाथ भी मान रही है। लेकिन, इस थ्योरी के लिए उसके पास कोई तर्क नहीं है।
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तस्वीर-एक सीसीटीवी फुटेज के वीडियोग्रैब एआई के माध्यम से अपडेट किए गए है।
– फोटो : एआई
सोमवार को जेल भेजी गई हत्यारोपी बहू शालू के परिजन भी पुलिस के दावे से असहमत दिखे और पुलिस से शालू को छोड़ देने के लिए कहते रहे। वहीं, हत्यारोपी शालू ने पूछताछ में अपना जुर्म भी नहीं स्वीकार किया। बल्कि वह यही कहती रही कि पापा तो बहुत अच्छे थे। उन्हें इतनी बेरहमी से विशाल ने क्यों मार दिया।
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तस्वीर-दो सीसीटीवी फुटेज के वीडियोग्रैब एआई के माध्यम से अपडेट किए गए है।
– फोटो : एआई
विशाल को साथ ले जाकर बनवाई थी डुप्लीकेट चाबी
पुलिस ने बताया कि जन्माष्टमी के आसपास सुब्रत और शालू शॉपिंग के लिए विशाल को विनीत से छिपाकर अपने साथ ले गए थे। तीनों पहले कार से परेड गए और वहां खरीदारी की। सुब्रत गाड़ी में ही बैठे रहे। तीनों गुमटी नंबर पांच पहुंचे।
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तस्वीर-तीन सीसीटीवी फुटेज के वीडियोग्रैब एआई के माध्यम से अपडेट किए गए है।
– फोटो : एआई
शालू ने फ्लैट की डुप्लीकेट चाबी बनवाकर विशाल को सौंपी। सोमवार को थाने में शालू और विशाल का आमना सामना हुआ तो विशाल ने सुपारी देने व चाभी बनवाने की बात कही। इस पर शालू एकटक सिर्फ उसकी बातें सुनती रही।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी बहू
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस का कहना है कि कुछ समय पहले कारोबारी विनीत की मां घर आई थी। विनीत ने घर की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगवाए थे। इससे लगता है कि विनीत को अनहोनी की आशंका थी। शालू के मुताबिक उसे कैमरों से परेशानी होती थी। अक्सर वह कैमरे बंद कर दिया करती थी।